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ⓘ धर्म - धर्म, प्रवेशद्वार: धर्म और विश्वास, शिव दयाल सिंह, अंतःकरण, अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ, अकाली, जगमोहिनी सम्प्रदाय, नौभार पंथ ..




                                               

धर्म

पन्थ/सम्प्रदाय के अर्थ में धर्म के लिए धर्म देखें। राजधर्म के लिए राजधर्म देखें। दक्षिणा के लिए दक्षिणा देखें। धर्म पालि: धम्म भारतीय संस्कृति और भारतीय दर्शन की प्रमुख संकल्पना है। धर्म शब्द का पश्चिमी भाषाओं में किसी समतुल्य शब्द का पाना बहुत कठिन है। साधारण शब्दों में धर्म के बहुत से अर्थ हैं जिनमें से कुछ ये हैं- कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण, सद्-गुण आदि। धर्म का शाब्दिक अर्थ होता है, धारण करने योग्यसबसे उचित धारणा, अर्थात जिसे सबको धारण करना चाहिये। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, जैन या बौद्ध आदि धर्म न होकर सम्प्रदाय या समुदाय मात्र हैं।" सम्प्रदाय” एक परम्परा के मानने वालों का समूह है। ऐस ...

                                               

प्रवेशद्वार: धर्म और विश्वास

                                               

शिव दयाल सिंह

श्री शिव दयाल सिंह साहब राधास्वामी मत की शिक्षाओं का प्रारंभ करने वाले पहले सन्त सतगुरु थे। उनका जन्म नाम सेठ शिव दयाल सिंह था। उनका जन्म 24 अगस्त 1818 में आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत में जन्माष्टमी के दिन हुआ। पाँच वर्ष की आयु में उन्हें पाठशाला भेजा गया जहाँ उन्होंने हिंदी, उर्दू, फारसी और गुरमुखी सीखी। उन्होंने अरबी और संस्कृत भाषा का भी कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त किया। उनके माता-पिता हाथरस, भारत के परम संत तुलसी साहब के अनुयायी थे। छोटी आयु में ही इनका विवाह फरीदाबाद के इज़्ज़त राय की पुत्री नारायनी देवी से हुआ। उनका स्वभाव बहुत विशाल हृदयी था और वे पति के प्रति बहुत समर्पित थीं। शिव दयाल सि ...

                                               

अंतःकरण

अंत:करण का तात्पर्य उस मानसिक शक्ति से है जिससे व्यक्ति उचित और अनुचित का निर्णय करता है। सामान्यत लोगों की यह धारणा होती है कि व्यक्ति का अंतकरण किसी कार्य के औचित्य और अनौचित्य का निर्णय करने में उसी प्रकार सहायता कर सकता है जैसे उसके कर्ण सुनने में, अथवा नेत्र देखने में सहायता करते हैं। व्यक्ति में अंतःकरण का निर्माण उसके नैतिक नियमों के आधापर होता है। अंतकरण व्यक्ति की आत्मा का वह क्रियात्मक सिद्धांत माना जा सकता है जिसकी सहायता से व्यक्ति द्वंद्वों की उपस्थिति में किसी निर्णय पर पहुँचता है। अभिज्ञान शाकुंतलम् में कालिदास कहते हैं: सतां हि संदेहपदेषु वस्तुषु प्रमाणमन्तकरणप्रवृत्तय।

                                               

अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ

अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ या इस्कॉन, को "हरे कृष्ण आन्दोलन" के नाम से भी जाना जाता है। इसे १९६६ में न्यूयॉर्क नगर में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने प्रारंभ किया था। देश-विदेश में इसके अनेक मंदिऔर विद्यालय है।

                                               

अकाली

अकाल शब्द का शब्दार्थ है - कालरहित। भूत, भविष्य तथा वर्तमान से परे, पूर्ण अमरज्योति ईश्वर, जो जन्ममरण के बंधन से मुक्त है और सदा सच्चिदानंद स्वरूप रहता है, उसी का अकाल शब्द द्वारा बोध कराया गया है। उसी परमेश्वर में सदा रमण करने वाला अकाली कहलाया। कुछ लोग इसका अर्थ काल से भी न डरने वाला लेते हैं। परंतु तत्वतः दोनों भावों में कोई भेद नहीं है। सिक्ख धर्म में इस शब्द का विशेष महत्व है। सिक्ख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव ने परमपुरुष परमात्मा की आराधना इसी अकालपुरुष की उपासना के रूप में प्रसारित की। उन्होंने उपदेश दिया कि हमें संकीर्ण जातिगत, धर्मगत तथा देशगत भावों से ऊपर उठकर विश्व के समस्त ध ...

                                               

जगमोहिनी सम्प्रदाय

जगमोहन संप्रदाय, पूर्वी बंगाल का एक संप्रदाय । अपने नाम जगमोहन गोस्वामी के नाम था, जो इसके प्रवर्तक माना जाता है । इस संप्रदाय के लोगों को निर्गुण उपासक रहे हैं. गुरु की पूजा करते, उनकी आराधना का मुख्य अंग है । यह दो भेद है - वह और उदासीन. लेकिन इसकी कोई शास्त्र उपलब्ध नहीं है ।

नौभार पंथ
                                               

नौभार पंथ

कार्गो पंथ मलेशिया और ओशिनिया के अन्य द्वीपों की तकनीक में अग्रसर विश्वविद्यालयों के साथ टकराव विकसित किया जा रहा है पर कुछ धर्मों का कहना है । इन धर्म इस विश्वास पर आधारित हैं कि कुछ धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए अपने द्वीप पर कार्गो भेज दिया जाएगा ।