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ⓘ संवेदक प्रक्रमण किसी जीव में अपने शरीऔर आसपास के पर्यावरण से ज्ञानेन्द्रियों द्वारा बोध होने वाली जानकारी को संगठित करने की प्रक्रिया होती है। यह जीच को अपना शर ..




                                     

ⓘ संवेदक प्रक्रमण

संवेदक प्रक्रमण किसी जीव में अपने शरीऔर आसपास के पर्यावरण से ज्ञानेन्द्रियों द्वारा बोध होने वाली जानकारी को संगठित करने की प्रक्रिया होती है। यह जीच को अपना शरीर प्रभावपूर्ण ढंग से प्रयोग करने की क्षमता देता है। इसमें मस्तिष्क द्वारा दृश्य बोध, श्रवण तंत्र, छुने का बोध, गंधानुभूति, इत्यादि से प्राप्त सूचनाओं के प्रक्रमण का केन्द्रीय स्थान है।

                                     
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