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काललेखी

काललेखी एक विशेष प्रकार की घड़ी होती है जिसे स्टोप वाच के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। किन्तु मूलतः काललिख ऐसा यन्त्र था जिसमें समय को कागज या फीते पर लिखने की व्यवस्था थी।

                                               

जल घड़ी

जल घड़ी एक समयमापक युक्ति है जिसमें समय मापन के लिये किसी द्रव के नियंत्रित प्रवाह का सहारा लिया जाता है। विभिन्न सभ्यताओं में इनका उपयोग प्राचीन काल से ही हो रहा था।

                                               

टाइम बॉल

टिइम बाॅल या कालगेंद एक, अब नाकारा हो चुके समय-संकेतक युक्ती का नाम था, जिसे पहले अपतटीय जहाज़ों एवं नाविकों को सटीक समय का संकेत कराने के लिये इस्तमाल किया जाता था ताकी बंदर्गाह या सफ़पर जा रहे अन्य जहाज़ अपने समुद्री कालमापियों को सफ़पर जाने से पहले सटीक रूप से निर्धारित कर सकें। १९वीं सदी में इसका इस्तमाल चरम पर था। इलेक्ट्रानिक समय संकेतों का आविश्कार एवं प्रचनल के साथ ही इस गतकालीन युक्ती का उपयोग धीरे-धीरे खनम हो गया, परन्तु कुछ जगहों पर कसे अभी भी ऐतिहासिक पर्यटक आकर्शणों के तौपर रखा गया है। इस्का आविश्कार सन १८२९ में राॅबर्ट वाॅशोप नामक एक अंग्रेज़ ऐडमिरल द्वारा किया गया था।

                                               

पानी की घड़ी

इसके लिए एक बांस के टुकड़े को काट के जल स्रोत के पास रख देते थे यह पूर्ण भरते है आवाज के साथ सूचित करती है इसे बार बार बदले की आवश्यकता नहीं होती है

                                               

युग (बुनियादी तिथि)

कालक्रम विज्ञान में युग समय के किसी ऐसे क्षण को कहते हैं जिस से किसी काल-निर्धारण करने वाली विधि का आरम्भ किया जाए। उदाहरण के लिए विक्रम संवत कैलेण्डर को ५६ ईसापूर्व में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय पाने के अवसर पर शुरू किया, यानि विक्रम संवत के लिए ५६ ईपू ही युग है जिसे शून्य मानकर समय मापा जाता है।

                                               

युग संधि

दो युगों के बीच का समय संधि काल या युग संधि नाम से जाना जाता है| प्रस्तुत लेख यहाँ पर कलियुग और सतियुग के बीच के समय को इंगित करता है | काल गणना के संदर्भ में युग शब्द का उपयोग अनेक प्रकार से होता है। जिन दिनों जिस प्रचलन या प्रभाव की बहुलता होती है उसे उसी नाम से पुकारा जाने लगता है। रामराज्य के दिनों की सर्वतोन्मुखी प्रगति, शांति और सुव्यवस्था को सतयुग के नाम से जाना जाता है। कृष्ण की विशाल भारत निर्माण सम्बंधी योजना के एक संघर्ष पक्ष को महाभारत का नाम दिया जाता हे। परीक्षित के काल में कलयुग के आगमन और उससे राजा के संभाषण अनुबंधों का पुराण गाथा में वर्णन है। अब भी रोबोट युग, कम्प्यूटर यु ...

                                               

शंकुक

इसमें मुख्यत: फर्श, या किसी क्षैतिज समतल, पर एक खड़ा छड़ होता था, जिसकी छाया की स्थिति दिन का समय बताती थी। 2.000 ई. पू. में ही बैबिलोनिया में इसका प्रयोग होता था और हेराडोटस Herodotus के अनुसार अनैक्सिमैंडर Anaximander ने लगभग 600 ई. पू. यूनान में इसका प्रचार किया। खड़े छड़ की छाया की लंबाई, दिशा तथा छाया के अग्र द्वारा अनुरेखित रेखा से रविमार्ग के तिर्यक्ता, अयनांत की तिथि अत: सौर वर्ष और याम्योत्तर का पता लगाना संभव होता था। कभी-कभी शंकु का खड़ा छड़ किसी गोलार्ध के अवतल पृष्ठ के केंद्र में बिठाया जाता है। एक रूपांतरण में, यह एक ऊँचा गुंबद था, जिसके ऊपरी भाग में छेद बना था, जिससे होकर सू ...

                                               

समयमापन

जब समय बीतता है, तब घटनाएँ घटित होती हैं तथा चलबिंदु स्थानांतरित होते हैं। इसलिए दो लगातार घटनाओं के होने अथवा किसी गतिशील बिंदु के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक जाने के अंतराल को समय कहते हैं। समय नापने के यंत्र को घड़ी अथवा घटीयंत्र कहते हैं। इस प्रकार हम यह भी कह सकते हैं कि समय वह भौतिक तत्व है जिसे घटीयंत्र से नापा जाता है। सापेक्षवाद के अनुसार समय दिग्देश के सापेक्ष है। अत: इस लेख में समयमापन पृथ्वी की सूर्य के सापेक्ष गति से उत्पन्न दिग्देश के सापेक्ष समय से लिया जाएगा। समय को नापने के लिए सुलभ घटीयंत्र पृथ्वी ही है, जो अपने अक्ष तथा कक्ष में घूमकर हमें समय का बोध कराती है; किंतु पृथ्व ...

                                     

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