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ⓘ प्रोतिमा बेदी. प्रोतिमा गौरी बेदी 12 अक्टूबर 1948 - 18 अगस्त 1998 एक भारतीय मॉडल थी जो बाद में भारतीय शास्त्रीय नृत्य, ओडिसी की व्याख्याता बनी, तथा जिन्होनें 19 ..




प्रोतिमा बेदी
                                     

ⓘ प्रोतिमा बेदी

प्रोतिमा गौरी बेदी 12 अक्टूबर 1948 - 18 अगस्त 1998 एक भारतीय मॉडल थी जो बाद में भारतीय शास्त्रीय नृत्य, ओडिसी की व्याख्याता बनी, तथा जिन्होनें 1990 में बैंगलोर के पास एक नृत्य गांव नृत्यग्राम की स्थापना की.

                                     

1. प्रारंभिक जीवन

प्रोतिमा बेदी, दिल्ली में पैदा हुई थीं और तीन बेटियों तथा एक बेटे के साथ चार बच्चों के परिवार में दूसरी बेटी थीं। उनके पिता, लक्ष्मीचंद गुप्ता एक व्यापारी थे जो हरियाणा के करनाल जिले के एक बनिया परिवार से संबंधित थे और उनकी मां रेबा बंगाली थी। अपनी शादी के विरोध के कारण उनके पिता को घर छोड़ना पड़ा, उसके बाद उन्होनें दिल्ली में काम करना शुरू किया, जहां उनकी पहली बेटी मोनिका के बाद प्रोतिमा का जन्म हुआ, प्रोतिमा के जन्म के बाद बिपिन और आशिता का जन्म हुआ।

1953 में, उनका परिवार गोवा तथा बाद में 1957 में मुंबई चला गया। नौ साल की उम्र में, उन्हें कुछ समय के लिए अपने पिता की बहन के पास रहने के लिए करनाल जिले में भेजा गया, जहां उन्होनें स्थानीय स्कूल में अध्ययन किया। वापस लौटने पर, उन्हें पंचगनी में लड़कियों के बोर्डिंग स्कूल, किमिंस हाई स्कूल भेजा गया जहां उन्होनें प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, बाद में उन्होनें सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज, मुंबई 1965-67 से स्नातक की उपाधि ली.

                                     

2.1. कैरियर मॉडलिंग कैरियर

1960 के अंत तक, वह एक प्रसिद्द मॉडल बन गई थीं। 1974 में, मुंबई में जुहू बीच पर बॉलीवुड पत्रिका सिनेब्लिट्ज़ के लिए, दिन में नग्न दौड़ने के कारण वह ख़बरों में आई.

                                     

2.2. कैरियर नृत्यग्राम

बंगलौर के बाहरी इलाके में स्थित, नृत्यग्राम, विभिन्न भारतीय शास्त्रीय नृत्यों के लिए भारत का पहला मुफ़्त नृत्य गुरुकुल बन गया जिसमे सात शास्त्रीय नृत्य शैलियों के लिए सात गुरुकुल और मार्शल आर्ट के दो प्रकार छाऊ और कलारीपयाट्टू थे। वह सही तरह के वातावरण में गुरु शिष्य परम्परा को पुनर्जीवित करना चाहती थीं। 11 मई 1990 को तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा नृत्यग्राम का उद्घाटन किया गया। नृत्य स्कूल में भारत के सभी भागों से आये छात्रों का एक छोटा सा समुदाय है, किन्तु उनका उद्देश्य एक ही है - नृत्य. नृत्यग्राम के कलाकारों की टुकड़ी शीघ्र ही दुनिया भर में प्रदर्शन कर रही थी।

एक आदर्श नृत्य गांव के रूप में बने नृत्यग्राम का निर्माण विशेषज्ञ वास्तुकार जेरार्ड डा कुन्हा द्वारा किया गया था। इसने 1991 में सर्वश्रेष्ठ ग्रामीण वास्तुकला पुरस्कार भी जीता था। नृत्यग्राम को चलाने के लिए धन जुटाने हेतु 1992 में एक कुटीरम पर्यटक रिसोर्ट बनाया गया था। नृत्यग्राम वार्षिक नृत्य उत्सव वसंत हब्बा का स्थल भी है, जो सबसे पहले 1994 में शुरू हुआ था। सुनामी के आने और धन की कमी के कारण 2005-2007 के बीच वसंत हब्बा का आयोजन नहीं हुआ है।



                                     

2.3. कैरियर अंतिम वर्ष

प्रोतिमा के पुत्र सिद्धार्थ, जो सिजोफ्रेनिया एक प्रकार का पागलपन से पीड़ित थे, ने उत्तरी कैरोलीना में अपने अध्ययन के दौरान जुलाई 1997 में आत्महत्या कर ली, इस घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया, जब 1998 की शुरुआत में उन्होनें अपने सन्यास की घोषणा की और अपना नाम प्रोतिमा गौरी कर लिया, जल्द ही लेह से शुरुआत कर के उन्होनें हिमालय क्षेत्र की यात्रा शुरू कर दी. बाद में, अगस्त में, प्रोतिमा गौरी ने कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा आरम्भ की और यहीं पर हिमालय में पिथोरागढ़ के पास मालपा भूस्खलन में गायब हो कर अपने पीछे एक स्थाई उपलब्धि छोड़ गईं - एक समृद्ध नृत्य गांव, नृत्यग्राम जहां भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शैलियां सीखने के लिए छात्र आते रहेंगे. उनका पार्थिव शरीऔर सामान कई दिनों के बाद 7 अन्य लाशों के साथ भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित एक गांव, मालपा में भूस्खलन के अवशेषों से बरामद हुआ।

सन् 2000 में उनकी बेटी पूजा बेदी द्वारा प्रकाशित उनकी आत्मकथा, टाइमपास में, वह अपने सभी संबंधों, अपनी बिंदास जीवनशैली, अपने पारिवारिक जीवन, अपनी स्वप्निल परियोजना नृत्यग्राम और सन्यासिन के रूप में अपने जीवन के अंतिम दिनों के परिवर्तन काल, जब उन्होनें सार्वजनिक जीवन से अवकाश लिया और हिमालय की खोज करने का निर्णय लिया, का स्पष्ट ब्यौरा प्रस्तुत करती हैं।

                                     

3. व्यक्तिगत जीवन

अपने मॉडलिंग के जोशीले दिनों में प्रोतिमा बेदी की कबीर बेदी से मुलाक़ात हुई. जब एक पार्टी में उनकी दोस्त नीना ने उनका परिचय कराया, उन्होनें उसे एक ओर खींचा और कहा "तुमने इसे कहां छुपा कर रखा था, वह शानदार है!" अपनी मुलाक़ात के कुछ महीनों के भीतर, वह उनके साथ रहने के लिए अपने अभिभावकों का घर छोड़ दिया. उस समय के बम्बई समाज में ऐसा कभी नहीं "हुआ" था, यह उनकी व्यक्तिवादी भावनाओं की ओर एक और संकेत था, जो उनके पूरे जीवन के दौरान जारी रहा. प्रोतिमा के जीवन में कुछ भी "साधारण" या "उबाऊ" नहीं था। वह और कबीर 1969 में शादी के बंधन में बंधे और उनके दो बच्चे हुए - पूजा बेदी, जिसने एक टीवी प्रस्तोता बनने से पहले कुछ समय के लिए अभिनय किया और एक बेटा सिद्धार्थ.

अपने जीवन के दौरान पंडित जसराज, वसंत साठे, विजयपत सिंघानिया, मारियो क्रोप्फ़, जैक्स लेबेल, रोम व्हिटकर और रजनी पटेल से भी उनके सम्बन्ध थे।

                                     
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