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ⓘ स्कन्दगुप्त (नाटक)

स्कन्दगुप्त, कुमारगुप्त, गोविन्दगुप्त, पर्णदत्त, चक्रपालित, बन्धुवर्म्मा, भीमवर्म्मा, मातृगुप्त, प्रपञ्चबुद्धि, शर्वनाग, कुमारदास धातुसेन, पुरगुप्त, भटार्क, पृथ्वीसेन, खिङ्गिल, मुद्गल, प्रख्यातकीति, देवकी, अनन्तदेवी, जयमाला, देवसेना, विजया, कमला, रामा, मालिनी आदि।

                                     

1. विशेषताएँ

इसमें पाँच अंक हैं तथा अध्यायों की योजना दृश्यों पर आधारित है। प्रथम, द्वितीय तथा चतुर्थ अंक में सात और तृतीय तथा पंचम अंक में छह दृश्य हैं। इस नाटक की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए दशरथ ओझा हिन्दी नाटकः उद्भव और विकास में लिखते हैं कि- स्कन्दगुप्त नाटक के वस्तु-विन्यास में प्रसाद की प्रतिभा सजीव हो उठी है और उनकी नाट्यकला ने अपना अपूर्व कौशल दिखाया है। इस नाटक में भारतीय और यूरोपीय दोनों नाट्यकलाओं का सहज समन्वय है।"

                                     
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