ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 50




                                               

अंतर्पाठ

अंतर्पाठ किसी एक लिखाई या पाठ के अर्थ को किसी दूसरे पाठ द्वारा निर्धारित या परिवर्तित करने को कहते हैं। अंतर्पाठ का प्रयोग पाठक को प्रभावित करने के लिये और पाठ्य सामग्री में अर्थों की गहराई बढ़ाने के लिये करा जाता है।

                                               

सलीम (प्रेमचंद)

सलीम प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास कर्मभूमि का प्रमुख चरित्र है। वह अमरकांत का साथी औ्र शहर के रईस एवं प्रभावशाली राजनेता हाफिज अली, जो बनारस की म्युनिसिपैलिटी के मेयर हैं, का पुत्र है। वह भारतीय लोक सेवा की तैयारी करने वाले युवकों का प्रतिनिधी है ...

                                               

विसूत्र

सामान्य सत्य, सिद्धान्त या प्रेक्षण को अभिव्यक्त करने वाली संक्षिप्त लोकोक्तियों को विसूत्र कहते हैं। जैसे- अहिंसा परमो धर्मः, अति सर्वत्र वर्जयेत आदि। पहले एफोरिज्म शब्द का उपयोग हिप्पोक्रेटस के एफोरिज्म के लिये ही किया जाता था। उसकी कृति का पहल ...

                                               

द सेकेंड सेक्स

द सेकेंड सेक्स सिमोन द बोउआर द्वारा फ़्रान्सीसी भाषा में लिखी गई पुस्तक है जिसने स्त्री संबंधी धारणाओं और विमर्शों को गहरे तौपर प्रभावित किया है। इसे नारीवाद पर लिखी गयी सबसे उत्कृष्ट और लोकप्रिय पुस्तकों में गिना जाता है। उन्होंने यह किताब 38 सा ...

                                               

अंजली भारती

अंजली भारती का पहला उपन्यास "घर-परिवाऔर रिश्ते" है, जिसे पहले सावित्री प्रकाशन और फिर बाद में आत्माराम एंड संस ने प्रकाशित किया।। उनके उपन्यास "स्वयंसिद्धा" को आत्माराम एण्ड सन्स ने मई ०२, २००७ को प्रकाशित किया था। यह उस स्त्री की कहानी है जिससे ...

                                               

अंबिकादत्त व्यास

भारतेन्दु मण्डल के प्रसिद्ध कवि अंबिकादत्त व्यास का जन्म सन् १८५८ ई. में तथा मृत्यु सन् १९०० ई. में हुई। इन्होंने कवित्त सवैया की प्रचलित शैली में ब्रजभाषा में रचना की। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के समकालीन हिन्दी सेवियों में पंडित अंबिकादत्त व्यास बह ...

                                               

अतिशयोक्ति अलंकार

अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार है इसका उदाहरण है: पड़ी अचानक नदी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार । राजा ने सोचा इस बार, तब तक चेतक था उस पार ।। 2: हनुमान की पूछं मे लगन न पाई आग । लंका सारी जल गई गए निसाचर भाग । बालों को ...

                                               

अत्युक्ति अलंकार

अत्युक्ति अलंकार एक अलंकार है। काव्य में जहाँ किसी की झूठी वीरता, वियोग, उदारता, प्रेम, सुन्दरता, यश आदि का बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया जाता है कि देखने में हास्यास्पद लगे तो वहां अत्युक्ति अलंकार होता है।जैसे- इत आवति चलि जेउत चली छः सातक हाथ। च ...

                                               

अधिक पद दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

अनधिकृत दोष

काव्य में एक प्रकार का अर्थ दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

अनुप्रास

अलंकार का शाब्दिक अर्थ है आभूषण अर्थात गहना ।जिस प्रकार नारी अलंकार से युक्त होने पर सुंदर दिखती है उसी प्रकार काव्य होता है। महाकवि केशव ने अलंकारों को काव्य का अपेक्षित गुण माना है। उनके अनुसार "भूषण बिनु न विराजहि कविता,वनिता,मित्त।"उनकी दृष्ट ...

                                               

अप्रतीत दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

अमृत पदार्थ दोष

काव्य में एक प्रकार का वाक्य दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

अमृतसर आ गया है

अमृतसर आ गया है ", भीष्म साहनी द्वारा लिखित एक कहानी है। यह किताब भारत के विभाजन के परिदृश्य पर लिखी गई है। कहानी में शरणार्थियों के एक समूह का पाकिस्तान से भारत के सीमावर्ती शहर अमृतसर की ओर यात्रा के दौरान के भयावहता और विनाश का वर्णन हैं। साहन ...

                                               

अश्लील दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

असंगति अलंकार

अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार। असंगति - कारण और कार्य में संगति न होने पर असंगति अलंकार होता है । जैसे - हृदय घाव मेरे पीर रघुवीरै । घाव तो लक्ष्मण के हृदय में है, पर पीड़ा राम को है, अत: असंगति अलंकार है । 2- उरझ ...

                                               

इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐंदुई ऐ ऐंदुस्तानी

इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐंदुई ऐ ऐंदुस्तानी के लेखक गार्सा द तासी हैं। इस ग्रंथ को उर्दू - हिन्दी अथवा हिन्दुस्तानी साहित्य का सर्व प्रथम इतिहास ग्रंथ माना जाता है। इसमें हिन्दी उर्दू के अनेक कवियों और लेखकों की जीवनियाँ, ग्रंथ विवरण और उद्धरण हैं ...

                                               

कबीर

कबीर या भगत कबीर 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। इनकी रचनाओं ने हिन्दी प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनका लेखन सिखो ...

                                               

कबीर के आलोचक (पुस्तक)

डॉ॰ धर्मवीर द्वारा लिखित इस पुस्तक में हिंदी साहित्य में कबीपर लिखने वाले पूर्ववर्ती आलोचकों के लेखन का विश्लेषणात्मक एवं दलित विमर्श की दृष्टि से अध्ययन किया गया है। इसमें पं। हजारीप्रसाद द्विवेदी के कबीर संबंधी विश्लेषण को ब्राह्मणवादी आलोचक की ...

                                               

कमलेश भट्ट कमल

कमलेश भट्ट कमल गाजियाबाद स्थित हिन्दी लेखक हैं। ग़ज़ल, कहानी, हाइकु, साक्षात्कार, निबन्ध, समीक्षा एवं बाल-साहित्य आदि विधाओं में रचना करते हैं।

                                               

कविता कौमुदी

कविता कौमुदी हिन्दी के लोककवि रामनरेश त्रिपाठी की रचना है। यह उन 15 हजार से भी अधिक लोकगीतों का संग्रह है जिन्हें त्रिपाठी जी ने 1925 और 1930 के बीच अवध के गाँव-गाँव में घूम कर संग्रह किया था। सन 1928 के अंत में प्रकाशित इस पुस्तक की प्रथम प्रति ...

                                               

कामायनी

कामायनी हिंदी भाषा का एक महाकाव्य है। इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। यह आधुनिक छायावादी युग का सर्वोत्तम और प्रतिनिधि हिंदी महाकाव्य है। प्रसाद जी की यह अंतिम काव्य रचना 1936 ई. में प्रकाशित हुई, परंतु इसका प्रणयन प्राय: 7-8 वर्ष पूर्व ही प्रारंभ ...

                                               

किशोर लेखनी

किशोर लेखनी हिन्दी की एक बाल पत्रिका है। इसका संपादन प्रकाशन देवेन्‍द्र कुमार देवेश द्वारा अपनी किशोर वय में किया गया था। इसका सूत्र वाक्‍य था--किशोरों की, किशोर द्वारा, किशोरों के लिए। पत्रिका के माध्‍यम से बालकिशोरों के साहित्‍य में बालकिशोरों ...

                                               

कुण्डलिया

कुंडलिया दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के ६ चरण होते हैं तथा प्रत्येकचरण में २४ मात्राएँ होती है। इसे यूँ भी कह सकते हैं कि कुंडलिया के पहले दो चरण दोहा तथा शेष चार चरण रोला से बने होते है। दोहा के प्रथम एवं तृतीय चरण में १३-१३ मात् ...

                                               

कुबेर नाथ राय

कुबेरनाथ राय हिन्दी ललित निबन्ध परम्परा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर, सांस्कृतिक निबन्धकाऔर भारतीय आर्ष-चिन्तन के गन्धमादन थे। उनकी गिनती आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी और विद्यानिवास मिश्र जैसे ख्यातिलब्ध निबन्धकारों के साथ की जाती है।

                                               

कृष्ण गीतावली

कृष्ण गीतावली गोस्वामी तुलसीदास की एल लघु काव्य कृति है। इसमें ६१ पदों के माध्यम से कृष्ण चरित को काव्य का विषय बनाया गया है। यह ग्रन्थ ब्रजभाषा में है - कबहुं न जात पराए धाम ही। खेलत ही निज देखों आंगन सदा सहित बलराम ही। ।

                                               

केशव

केशव या केशवदास 1555 विक्रमी और मृत्यु 1618 विक्रमी) हिन्दी साहित्य के रीतिकाल की कवि-त्रयी के एक प्रमुख स्तंभ हैं। वे संस्कृत काव्यशास्त्र का सम्यक् परिचय कराने वाले हिंदी के प्राचीन आचार्य और कवि हैं। इनका जन्म सनाढ्य ब्राह्मण कुल में हुआ था। इ ...

                                               

क्लिष्ट दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

गर्भित दोष

गर्भित दोष काव्य में एक प्रकार का वाक्य दोष है। परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- ...

                                               

ग्राम्य दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष। जब कविता में ऐसे ग्रामीण शब्दों का अधिक प्रयोग होता है जिनका प्रचलन किसी क्षेत्र विशेष में ही होता है, ऐसे शब्दों के प्रयोग से कविता में ग्राम्य दोष माना जाता है। परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर ...

                                               

ग्वाल कवि(रीतिग्रंथकार कवि)

ग्वाल कवि रीतिकाल के रीतिग्रंथकार कवि हैं। रीतिकाल के वे अन्तिम आचार्य हैं। इनके लिखे चौदह ग्रंथ मिलते हैं। इनमें प्रसिद्ध कृतियाँ हैं रसिकानन्द, साहित्यानन्द, रसरंग, अलंकार भ्रमभंजन, दूषणदर्पण तथा प्रस्तार प्रकाश। ग्वाल कवि का महत्त्व रीतिकार आच ...

                                               

घनानन्द

घनानंद रीतिकाल की तीन प्रमुख काव्यधाराओं- रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त के अंतिम काव्यधारा के अग्रणी कवि हैं। ये आनंदघन नाम स भी प्रसिद्ध हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने रीतिमुक्त घनानन्द का समय सं. १७४६ तक माना है। इस प्रकार आलोच्य घनानन्द वृंद ...

                                               

चंदायन

चंदायन, मुल्ला दाऊदकृत हिंदी का ज्ञात प्रथम सूफी प्रेमकाव्य। इसमें नायक लोर, लारा, लोरक, लोरिक अथवा नूरक और नायिका चाँदा या चंदा की प्रेमकथा वर्णित है। रचनाकाल विवादग्रस्त है। प्रसिद्ध इतिहासकार अल् बदायूनी के आधार पर, जिसने सन् 772 हिजरी के आसपा ...

                                               

चंद्रकांता (उपन्यास)

चंद्रकान्ता हिन्दी के शुरुआती उपन्यासों में है जिसके लेखक देवकीनन्दन खत्री हैं। सबसे पहले इसका प्रकाशन सन 1893 में हुआ था। यह लेखक का पहला उपन्यास था। यह उपन्यास अत्यधिक लोकप्रिय हुआ था और तब इसे पढ़ने के लिये बहुत लोगों ने देवनागरी/हिन्दी भाषा स ...

                                               

चन्द्रगुप्त (नाटक)

चन्द्रगुप्त हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककार जयशंकर प्रसाद का प्रमुख नाटक है। इसमें विदेशियों से भारत का संघर्ष और उस संघर्ष में भारत की विजय की थीम उठायी गयी है। प्रसाद जी के मन में भारत की गुलामी को लेकर गहरी व्यथा थी। इस ऐतिहासिक प्रसंग के माध्यम से ...

                                               

चिन्तामणि त्रिपाठी(रीतिग्रंथकार कवि)

चिंतामणि त्रिपाठी हिन्दी के रीतिकाल के कवि हैं। ये यमुना के समीपवर्ती गाँव टिकमापुर या भूषण के अनुसार त्रिविक्रमपुर जिला कानपुर के निवासी काश्यप गोत्रीय कान्यकुब्ज त्रिपाठी ब्राह्मण थे। इनका जन्मकाल संo १६६६ विo और रचनाकाल संo १७०० विo माना जाता ...

                                               

चौपाई

चौपाई मात्रिक सम छन्द का एक भेद है। प्राकृत तथा अपभ्रंश के १६ मात्रा के वर्णनात्मक छन्दों के आधापर विकसित हिन्दी का सर्वप्रिय और अपना छन्द है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में चौपाइ छन्द का बहुत अच्छा निर्वाह किया है। चौपाई में चार चरण होते ...

                                               

चौरासी वैष्णवन की वार्ता

चौरासी वैष्णवन की वार्ता, ब्रजभाषा में लिखित गद्य ग्रन्थ है। इसमें महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के पुष्टि सम्प्रदाय के शिष्यों की कथाएँ संकलित हैं। इसके रचयिता के सम्बन्ध में विद्वानों में मतभेद है,लेकिन ज्यादातर विद्वान गोस्वामी गोकुलनाथ के नाम पर सह ...

                                               

छाप तिलक सब छीनी

छाप तिलक सब छीनी, १४वीं सदी के सूफ़ी संत अमीर खुसरो की एक कविता है जो ब्रजभाषा में लिखी गयी थी। अक्सर क़व्वाली की तरह गाया जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप के मशहूर गायकों ने ये गाना गाया जैसे नुसरत फ़तेह अली ख़ान, फ़रीद अयाज़, नाहीद अख्तर, मेहनाज़ बेग ...

                                               

छायावाद के कवियों का राष्ट्रीय काव्य

छायावाद के कवियों का राष्ट्रवादी काव्य अपना नाम प्रचारित किये बगैर महादेवी ने जहां अपने प्रारम्भिक काव्य-काल में राष्ट्रीय जागरण की कवितायें लिखीं, वहीं प्रसाद, निराला और पन्त भी पीछे नहीं रहे. यद्यपि इन कवियों का प्रमुख काव्य स्वर राष्ट्रीय चेतन ...

                                               

जगदीश गुप्त

जगदीश गुप्त शिक्षाविद तथा हिन्दी के आधुनिक कवि थे। हिन्दी कविता में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी नयी कविता के प्रमुख कवियों-जगदीश गुप्त, रामस्वरुप चतुर्वेदी और विजयदेवनरायण साही में से एक हैं। डॉ जगदीश गुप्त का जन्म ०३ अगस्त १९२४ ई॰ को उत्त ...

                                               

जनवादी लेखक संघ

जनवादी लेखक संघ भारत के हिंदी और उर्दू लेखकों का एक बडा संगठन है और इसकी प्रांतीय एवं जिला स्तर तक की इकाईयां सक्रिय हैं। देश के कई जाने माने लेखक मसलन उदय प्रकाश. इब्बार रब्बी. विष्णु नागर. चंद्रबली सिंह. राजेन्द्र यादव. मुद्राराक्षस. दूधनाथ सिं ...

                                               

जय हो भ्रष्टाचार की

जय हो भ्रष्टाचार की निरुपमा प्रकाशन, मेरठ द्वारा प्रकाशित सुप्रसिद्ध कवि गाफिल स्वामी का काव्य संग्रह है। यह पुस्तक भ्रष्टाचापर केन्द्रित है। काव्य कृति किताब के लेखक कवि गाफिल स्वामी ने इस किताब के माध्यम से देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर क ...

                                               

जाबिर हुसैन

जाबिर हुसैन का जन्म सन् 1945 में गाँव नौनहीं राजगीर, जिला नालंदा, बिहार में हुआ। वह अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य के प्राध्यापक रहे। सक्रिय राजनीति में भाग लेते हुए 1977 में मुंगेर से बिहार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए और मंत्री बने। वर्ष 1995 से ...

                                               

जैसलमेर का साहित्य

मरु संस्कृति का प्रतीक जैसलमेर कला व साहित्य का केन्द्र रहा है। उसने हमारी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में एक प्रहरी का कार्य किया है। जैन श्र१ति की विक्रम संवत् १५०० खतर गच्छाचार्य जिन भद्रसूरि का निर्देशानुसार व जैसलमेर के महारावल ...

                                               

झरना (काव्य)

झरना के रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। यह पुस्तक छायावादी कविता की प्रारम्भिक पुस्तक है। छायावाद का प्रारम्भ झरना के प्रकाशन से ही माना जाता है। झरना का प्रकाशन १९१८ ई० में हुआ। इसमें अपेक्षाकृत कम कविताएँ थीं। आगामी संस्करणों में कुछ कविताएँ और रख दी ...

                                               

झूठा सच

झूठा सच हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार यशपाल का सर्वोत्कृष्ट एवं वृहद्काय उपन्यास है। वतन और देश तथा देश का भविष्य नाम से दो भागों में विभाजित इस महाकाय उपन्यास में विभाजन के समय देश में होने वाले भीषण रक्तपात एवं भीषण अव्यवस्था तथा स्वतन्त्रता के उ ...

                                               

ढोला-मारू

ढोला मारू रा दूहा ग्यारहवीं शताब्दी मे रचित एक लोकभाषा-काव्य है। मूलतः दोहों में रचित इस लोक काव्य को सत्रहवीं शताब्दी मे कुशलराय वाचक ने कुछ चौपाईयां जोड़कर विस्तार दिया। इसमे राजकुमार ढोला और राजकुमारी मारू की प्रेमकथा का वर्णन है। डोला-मारू की ...

                                               

तार सप्तक

तार सप्तक एक काव्य संग्रह है। अज्ञेय द्वारा 1943 ई० में नयी कविता के प्रणयन हेतु सात कवियों का एक मण्डल बनाकर तार सप्तक का संकलन एवं संपादन किया गया। तार सप्तक नयी कविता का प्रस्थान बिंदु माना जाता है। इसका ऐतिहासिक महत्त्व इस रूप में है कि इसी स ...

                                               

तिलिस्म-ए-होशरुबा

तिलिस्म-ए-होशरुबा एक हिन्दुस्तानी लोक कथा संग्रह है। इसकी कहानियाँ पुराने दौर में महिलाएँ छोटे बच्चें को रात में बतौर कहानी सुनाया करती थीं। हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक राही मासूम रज़ा ने इस संग्रह पर पीएच. डी. की उपाधि के लिए अपना शोध किया था।