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अफगानिस्तान में बौद्ध धर्म

अफगानिस्तान में बौद्ध धर्म इस्लामिक युग से पहले इस क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक शक्तियों में से एक था। हिंदू कुश पर्वत के दक्षिण में यह धर्म व्यापक रूप से फैला हुआ था। बौद्ध धर्म पहली बार अफगानिस्तान में 305 ईसा पूर्व में आया था जब ग्रीक सेल्यूसीड स ...

                                               

हड्डा

हड्डा अफ़्ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रान्त में जलालाबाद से दस किमी दक्षिण में स्थित एक बौद्ध पुरातत्व स्थल है जो प्राचीन गांधार क्षेत्र का भाग हुआ करता था। यहाँ मिलने वाली पुरातत्व वस्तुओं में यूनानी प्रभाव भी दिखता है। हड्डा में आज तक २३,००० से अधि ...

                                               

कर्मापा

साँचा:Tibetan-Chinese-box साँचा:तिब्बती बौद्ध धर्म कार्मापा या कार्मापा लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के कग्यु सम्रदाय के कार्मा काग्यु के सर्वोच्च गुरु हैं।

                                               

लाल टोपी सम्प्रदाय

लाल टोपी सम्प्रदाय तिब्बती बौद्ध धर्म के वे सम्प्रदाय हैं जिनमें भिक्षु औपचारिक समारोहों में लाल रंग की टोपियाँ पहनते हैं। इस श्रेणी में तीन मुख्य सम्प्रदाय आते हैं: कग्यु न्यिंगमा सक्या एक चौथा सम्प्रदाय गेलुग है, जो पीला टोपी सम्प्रदाय कहलाता ह ...

                                               

भृकुटी

भृकुटी देवी लिच्छ्वी राजकुमारी एवं तिब्बत के सबसे पहले सम्राट स्रोंचन गम्पो की पत्नी थीं। वे तारा देवी की अवतार मानी जातीं हैं। तिब्बती लोग उन्हें बल्मो जा ठ्रीचुन, बल्जा ठ्रीचुन या केवल ठ्रीचुन नाम से जानते हैं। उन्हें बेसा भी कहा जाता था।

                                               

काजा, स्पीति, हिमाचल प्रदेश

काजा स्पीति घाटी का उप-संभागीय मुख्यालय है। समुद्रतल से इसकी ऊंचाई ३,८०० मीटर है। यह स्पीति नदी के बांए किनारे पर खड़ी चोटी की तलहटी पर स्थित है। कभी यह स्पीति के प्रमुख "नैनो" का मुख्यालय था। यह राजधानी शिमला से ४२५ किलोमीटर दूर है। काजा में एक ...

                                               

किब्बर ग्राम

किब्बर ग्राम हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जनजातीय क्षेत्र स्पीति घाटी में स्थित है, जिसे शीत-मरुस्थल के नाम से भी जाना जाता है। यह समुद्र तल से ४,८५० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर बहुत से बौद्ध मठ हैं।

                                               

त्रिपुरा में बौद्ध धर्म

त्रिपुरा को केन्द्र शासित क्षेत्र से बढ़कर राज्य का दर्जा जनवरी 21, 1972 को दिया गया। त्रिपुरा में अधिकाँश रूप से बंगाली समुदाय के लोगों का प्रभाव है। यहाँ 19 अनुसूचित जनजातियाँ भी हैं जो आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं।

                                               

भारत में बौद्ध धर्म का पतन

भारत में बौद्ध धर्म का जन्म ईसा पूर्व ६ वी शताब्दी को हुआ था किन्तु कालक्रम में भारत से बौद्ध धर्म लगभग समाप्त हो गया जबकि विश्व के अन्य भागों में बौद्ध धर्म का प्रसार एवं विकास होता रहा। बौद्ध धर्म का विकास ईसा पूर्व ६ वी शताब्दी से प्रारम्भ होक ...

                                               

महार

महार एक प्रमुख सामाजिक समूह है जो महाराष्ट्र राज्य और आसपास के राज्यों में रहता हैं। महार,चमाऔर जाटव इन तिन्हाे समूह में सब लाेग बाैद्ध धर्मिय बन गए है। महाराष्ट्र की कुल जनसंख्या में १८% लोग बौद्ध है। सभी महार आज लगभग बौद्ध बन चूके है। महाराष्ट् ...

                                               

महाराष्ट्र में बौद्ध धर्म

महाराष्ट्र में बौद्ध धर्म राज्य का एक बड़ा धर्म है। महाराष्ट्र भारत का सबसे ज्यादा बौद्ध आबादी वाला राज्य है। बौद्ध धर्म महाराष्ट्र की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सातवाहन काल के दौरान महाराष्ट्र में बौद्ध धर्म का प्रसाऔर प्रसार बहुत बड़े ...

                                               

मैत्रेय परियोजना

मैत्रेय परियोजना एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो वर्ष 1990 से सक्रिय है, यह परियोजना भारत तथा अन्य जगहों पर मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमायें स्थापित करने के उद्देश्य से कार्यरत है। आरम्भिक योजनाओं के अनुसार इस परियोजना द्वारा कुशीनगर अथवा बोधगया में मैत ...

                                               

सारनाथ संग्रहालय

सारनाथ संग्रहालय भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण का प्राचीनतम स्‍थल संग्रहालय है। सारनाथ में बौद्ध मूर्तियों का विस्तृत संग्रह है। संग्रहालय में 6.832 मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ हैं।

                                               

कग्यु

कग्यु या कग्युद तिब्बती बौद्ध धर्म के छह मुख्य सम्प्रदायों में से एक है। अन्य पाँच न्यिंगमा, सक्या, जोनंग, गेलुग और बोन हैं। इनमें से सक्या, गेलुग और कग्यु को वज्रयान का नवप्रसार या सारमा कहा जाता है, क्योंकि यह तिब्बत में बौद्ध धर्म के फैलाव की ...

                                               

कोचीन यहूदी

कोचीन यहूदी, भारत में यहूदियों का सबसे पुराना समूह है, जिसकी जड़ें राजा सोलोमन के समय से आज तक चली आ रही हैं। कोचीन यहूदी दक्षिण भारत में कोचीन राज्य में बस गए थे, जो आज भारत के केरल राज्य का एक हिस्सा है। 12 वीं शताब्दी के प्रारंभ से, दक्षिणी भा ...

                                               

बेने इज़राइल

बेने इज़राइल यहूदियों का एक समूह है जो उन्नीसवीं सदी में कोंकण क्षेत्र के गाँवों में से निकलकर पास के भारतीय शहरों में जाके बस गए थे। आम तौपर इन्होंने मुंबई को अपना घर बनाया लेकिन कई पुणे और अहमदाबाद जैसे नज़दीकी शहरों में भी जाके बस गए थे। इस बड ...

                                               

हिन्दू मंदिर, दुबई

हिंदू मंदिर, दुबई ; स्थानीय रूप से शिव और कृष्ण मंदिर के रूप में प्रसिध्द है) दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में एक मंदिर परिसर है। यह मंदिर संयुक्त अरब अमीरात में बड़े हिंदू समुदाय को एक करता है और वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात में केवल एकमात्र हिंदू ...

                                               

कहरिंगन

कहरिंगन, जिसे आधुनिक काल में अधिकतर कहरिंगन हिन्दू कहा जाता है, दक्षिणपूर्व एशिया के बोर्नियो द्वीप पर स्थित इण्डोनेशिया के कालिमंतान क्षेत्र में बसने वाले डायक समुदाय का मूल लोक-धर्म है, जो हिन्दू धर्म व सर्वात्मवादी आस्थओं का मिलाप है। इण्डोनेश ...

                                               

प्रम्बनन

प्रम्बनन जावा में एक विशाल हिन्दु मन्दिर-परिसर है। इसका निर्माण ८५० में हुआ। यह युनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और लोकप्रिय पर्यटन स्थल और तीर्थस्थान भी है। इसमें तीन प्रमुख मन्दिर शिव, विष्णु और ब्रह्मा की हैं। शिव मन्दिर में तीन और मूर्तियां हैं- ...

                                               

जिब्राल्टर में हिन्दू धर्म

जिब्राल्टर में हिन्दू धर्म के अनुयायी मुख्यतः सिंधी मूल के हैं। जिब्राल्टर औबेरियन प्रायद्वीप और यूरोप के दक्षिणी छोपर भूमध्य सागर के प्रवेश द्वापर स्थित एक स्वशासी ब्रिटिश प्रवासी शासित प्रदेश है। 6.843 वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश की सीमा उत्त ...

                                               

जिब्राल्टर हिन्दू मंदिर

जिब्राल्टर हिन्दू मंदिर ब्रिटिश प्रवासी शासित प्रदेश जिब्राल्टर में स्थित हिन्दू मंदिर है। वर्ष 2000 में निर्मित हुआ जिब्राल्टर हिन्दू मंदिर इंजीनियर्स लेन पर स्थित है। यह जिब्राल्टर में मौजूद एकमात्र हिन्दू मंदिर है तथा क्षेत्र की हिन्दू आबादी क ...

                                               

राणा भगवानदास

न्यायमूर्ति राणा भगवानदास, पाकिस्तानी न्यायपालिका के एक उच्च सम्मानित व्यक्ति पाकिस्तानी सर्वोच्य न्यायालय के न्यायधीश एवं कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश थे। वो पाकिस्तान में २००७ के न्यायिक संकट और संक्षिप्त समय के लिए जब पदधारी इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौध ...

                                               

लगूना ताम्रपत्र अभिलेख

लगूना ताम्रपत्र अभिलेख फ़िलिपीन्ज़ के लगूना प्रान्त में मिला 900 ईसवी में तराशी हुई लिखाई वाला ताम्बे का एक प्लेट है। यह पुरानी कवि लिपि में पुरानी मलय भाषा में लिखी हुई है और फ़िलीपीन्ज़ में मिलने वाली प्राचीनतम लिखाई है। यह सन् 1989 में लुम्बंग ...

                                               

अगस्त्यमुनि मन्दिर, रुद्रप्रयाग

अगस्त्यमुनि मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि नामक शहर में स्थित है। पुराना मन्दिर दक्षिण भारतीय शैली में बना है जिसमें बाद में पुनरुद्धार हेतु परिवर्तन हुआ। मुख्य मन्दिर में अगस्त्यमुनि का कुण्ड एवं उनके शिष्य भो ...

                                               

उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड, उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण ९ नवम्बर २००० को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन २००० से २००६ तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में स्थानीय लोग ...

                                               

गर्जिया देवी मन्दिर

गर्जिया देवी मन्दिर उत्तराखण्ड में स्थित एक प्रसिद्ध मन्दिर है। यह मन्दिर सुन्दर खाल गाँव में आता है। रामनगर से इस मन्दिर की दूरी लगभग १५ किमी है। यह मन्दिर एक छोटी-सी पहाड़ी के शीर्ष पर बना हुआ है। कोसी नदी मन्दिर के निकट से होकर बहती है।

                                               

गोपीनाथ मन्दिर, उत्तराखण्ड

गोपीनाथ मंदिर एक हिन्दू मंदिर है जो भारत के उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जिले के गोपेश्वर में स्थित है। गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर ग्राम में है जो अब गोपेश्वर कस्बे का भाग है। गोपीनाथ मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर अपने व ...

                                               

धौलीनाग मंदिर

धौलीनाग मंदिर उत्तराखण्ड राज्य के बागेश्वर जनपद में धौलीनाग देवता को समर्पित एक पुराना मंदिर है। धौलीनाग मंदिर विजयपुर के पास एक पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है। धौलीनाग मंदिर मे रोजाना पूजा होती है और कुछ खास दिनों मे बहुत भीड़-भाड़ होती है, मुख्य र ...

                                               

फलासी तुङ्गनाथ

फलासी भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक गाँव है। यहाँ पर भगवान तुंगनाथ का प्राचीन मन्दिर है। मन्दिर में भगवान शिव तुंगनाथ का आपरुप ऐसी मूर्ति, लिंग आदि जो मनुष्य निर्मित न होकर स्वयं प्रकट होती है लिंग है। इसके अतिरिक्त भग ...

                                               

बालेश्वर मन्दिर

उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत नगर में स्थित बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर समूह है, जिसका निर्माण १०-१२ ईसवीं शताब्दी में चन्द शासकों ने करवाया था। इस मंदिर की वास्तुकला काफी सुंदर है। मन्दिर समूह चम्पावत नगर के बस स्टेशन से ल ...

                                               

महासू देवता मंदिर, हणोल

हणोल का महासू देवता मंदिर अथवा महासू महादेव मंदिर का निर्माण हूण राजवंश के नेता मिहिरकुल हूण ने करवाया था। हणोल गांव,जौनसार बावर, उत्तराखंड में स्थित यह मंदिर हूण स्थापत्य शैली का शानदार नमूना हैं व कला और संस्कृति की अनमोल धरोहर है। कहा जाता हैं ...

                                               

मानिला देवी मन्दिर, उत्तराखण्ड

मानिला देवी मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के शल्ट क्षेत्र में स्थित है। यह स्थान रामनगर से लगभग ७० किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ तक बस या निजी वाहन द्वारा पहुँचा जा सकता है। यह इस क्षेत्र का एक प्रसिद्द मन्दिर है और हर वर्ष य ...

                                               

सती अनसूइया मन्दिर, उत्तराखण्ड

सती माता अनसूइया मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जिले के मण्डल नामक स्थान में स्थित है। नगरीय कोलाहल से दूर प्रकृति के बीच हिमालय के उत्तुंग शिखरों पर स्थित इन स्थानों तक पहुँचने में आस्था की वास्तविक परीक्षा तो होती ही है, साथ ही आम पर् ...

                                               

सेममुखेम नागराज

सेममुखेम नागराज उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिला में स्थित एक प्रसिद्ध नागतीर्थ है। श्रद्धालुओं में यह सेम नागराजा के नाम से प्रसिद्ध है। मन्दिर का सुन्दर द्वार १४ फुट चौड़ा तथा २७ फुट ऊँचा है। इसमें नागराज फन फैलाये हैं और भगवान कृष्ण नागराज के फ ...

                                               

विरुपाक्ष मंदिर, ओड़िशा

विरुपाक्ष मंदिर ओड़िशा के कंधमाल जिला के मुख्यालय फूलबाणी से 60 किलोमीटर दूर चाकपाड़ा में स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर की मुख्य विशेषता यहां का शिवलिंग है जो दक्षिण की ओर झुका हुआ है। इसी प्रकार यहां के पेड़ों की प्रकृति भ ...

                                               

इब्राहिम-अल-इब्राहिम मस्जिद

इब्राहिम-अल-इब्राहिम मस्जिद, जिसे किंग फहद बिन अब्दुलअजीज अल-सऊद मस्जिद या मोस्क ऑफ़ द कस्टोडियन ऑफ़ द टू होली मोस्क्स के नामों से भी जाना जाता है, ब्रिटिश प्रवासी शासित प्रदेश जिब्राल्टर में स्थित एक मस्जिद है। यह मस्जिद क्षेत्र के दक्षिणी सिरे ...

                                               

जिब्राल्टर में इस्लाम धर्म

जिब्राल्टर में इस्लाम एक अल्पसंख्यक धर्म है। 2001 की जनगणना के अनुसार ब्रिटिश प्रवासी शासित प्रदेश जिब्राल्टर में लगभग दो हजार व्यक्ति इस्लाम धर्म के अनुयायी हैं, जो जिब्राल्टर की सम्पूर्ण आबादी का लगभग चार प्रतिशत है। जिब्राल्टर हमेशा से ही कई स ...

                                               

मूरिश किला

मूरिश किला जिब्राल्टर में स्थित एक एतिहासिक मध्ययुगीन किला है। इसमें कई इमारतें, द्वार, किलेबंद दीवारें व मशहूर टावर ऑफ़ होमेज व गेट हाउस शामिल है। इसमें स्थित टावर ऑफ़ होमेज जिब्राल्टर आने वाले यात्रियों को दूर से ही दिख जाता है। मूरिश किले का ज ...

                                               

जिब्राल्टर मेथोडिस्ट चर्च

जिब्राल्टर मेथोडिस्ट चर्च ब्रिटिश प्रवासी शासित प्रदेश जिब्राल्टर में स्थित ईसाई धर्म के मेथोडिज़्म सम्प्रदाय का गिरजाघर है। चर्च 297 मेन स्ट्रीट में जिब्राल्टर के राज्यपाल के आधिकारिक निवास स्थान द कॉन्वेंट के समीप स्थित है। यह ग्रेट ब्रिटेन के ...

                                               

पाकिस्तान में जैन धर्म

इस देश भर में कई प्राचीन जैन मंदिर बिखरे पड़े हुए हैं। बाबा धरम दास एक संत व्यक्ति थे जिनकी समाधि पाकिस्तान के पंजाब में सियालकोट शहर के पास, पसरूर में कृषि मुख्य कार्यालय के पीछे, चावंडा फाटिक के पास एक नाले के किनारे स्थित है जिसे देओका या देओक ...

                                               

आनंदमयी माँ

आनंदमयी मां भारत की एक अति प्रसिद्ध संत रही जो अनेक महान सन्तों द्वारा वन्दनीय थीं। माँ का जन्म 30 अप्रैल 1896 में तत्कालीन भारत के ब्रह्मन बारिया जिले के के खेऊरा ग्राम में हुआ आजकल वह बांग्लादेश के हिस्सा है। पिता श्री बिपिन बिहारी भट्टा चार्य ...

                                               

उड़िया बाबा जी महाराज

डिया बाबा, भी उरीया बाबा, उड़ीया बाबा या ओड़ीया बाबा के रूप में उल्लिखित और लिखे गए, एक हिंदू संत और एक गुरु थे । वे अद्वैत वेदांत के शिक्षक थे और उन्हें परमहंस माना जाता था। वह एक परिव्राजक था, अर्थात् जो किसी भी एक स्थान में बहुत लंबे समय तक नह ...

                                               

गोपीनाथ भान

गोपीनाथ भान कश्मीर से भारतीय सन्त थे। उनका जन्म के समय नाम गोपीनाथ भान था लेकिन बाद में वो भगवान गोपीनाथ जी के नाम से जाने गये।

                                               

नीम करौली बाबा

नीम करौली बाबा या नीब करौरी बाबा या महाराजजी की गणना बीसवीं शताब्दी के सबसे महान संतों में होती है। कैंची, नैनीताल, भुवाली से ७ कि॰मी॰ की दूरी पर भुवालीगाड के बायीं ओर स्थित है। कैंची मन्दिर में प्रतिवर्ष १५ जून को वार्षिक समारोह मानाया जाता है। ...

                                               

बामाक्षेपा

बामाक्षेपा पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला में अबस्थित तारापीठ के एक सिद्ध तांत्रिक संन्यासी हें | एसा माना जाता हे की माँ तारा देवी ने उन्हें प्रत्ख्य दर्शन दान दिया था | निगमानन्द उनके तन्त्र शिस्य थे |

                                               

रमण महर्षि

रमण महर्षि अद्यतन काल के महान ऋषि और संत थे। उन्होंने आत्म विचापर बहुत बल दिया। उनका आधुनिक काल में भारत और विदेश में बहुत प्रभाव रहा है। रमण महर्षि ने अद्वैतवाद पर जोर दिया। उन्होंने उपदेश दिया कि परमानंद की प्राप्ति अहम्‌ को मिटाने तथा अंत:साधन ...

                                               

शिरडी के सांई बाबा

साईंबाबा जिन्हें शिरडी साईंबाबा भी कहा जाता है एक भारतीय गुरु, और फकीर थे जैसे पर्वतों में हिमालय श्रेष्ठ है वैसे ही संतों में श्रेष्ठ हैं सांई। सांई नाम के आगे थे लगाना उचित नहीं, क्योंकि सांई आज भी हमारे बीच हैं। बस, एक बार उनकी शरण में होना जर ...

                                               

आशय

आशय मन की वह इच्छा है जो व्यक्ति को कोई कार्य करने को प्रेरित करती है। आशय का आपराधिक विधि में बहुत महत्त्व है बिना आशय के कोई बात अपराध नहीं हो सकती है।

                                               

योजना

योजना-किसी भी काम को करने से पहले उसका भौतिक या गैरभौतिक रूप से उसका रूपरेखा तैयाकर लेना ही योजना कहलाती हैंअंग्रेजी में कहते है। हिंदी में भी योजना के कई और अर्थ है जैसे रणनीति,नियोजन

                                               

त्रिपिटक कोरिया

त्रिपिटक कोरिया या त्रिपिटक कोरियाना या पालमान दाएजांग्गयेओंग बौद्ध त्रिपिटक धर्मग्रंथों का एक ऐतिहासिक कोरियाई संग्रह है। इसे 13वीं सदी ईसवी में 81.258 काठ के छपाई सांचों पर तराशा गया था। यह कोरियाई भाषा की हांजा लिपि में विश्व का सबसे पुराना और ...