ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 377




                                               

जैसलमेर का इतिहास

सँकरी गलियों वाले जैसलमेर के ऊँचे-ऊँचे भव्य आलीशान भवन और हवेलियाँ सैलानियों को मध्यकालीन राजशाही की याद दिलाती हैं। शहर इतने छोटे क्षेत्र में फैला है कि सैलानी यहाँ पैदल घूमते हुए मरुभूमि के इस सुनहरे मुकुट को निहार सकते हैं। माना जाता है कि जैस ...

                                               

जैसलमेर का संगीत

लोक संगीत की दृष्टि से जैसलमेर क्षेत्र का एक विशिष्ट स्थान रहा है। यहाँ पर प्राचीन समय से मा राग गाया जाता रहा है, जो इस क्षेत्र का पर्यायवाची भी कहा जा सकता है। यहाँ के जनमानस ने इस शुष्क भू-ध्रा पर मन को बहलाने हेतु अत्यंत ही सरस व भावप्रद गीतो ...

                                               

जैसलमेर की चित्रकला

चित्रकला की दृष्टि से जैसलमेर का विशिष्ट स्थान रहा है। भारत के पश्चिम थार मरुस्थल क्षेत्र में विस्तृत यह राज्य यहाँ दूर तक मरु के टीलों का विस्तार है, वहीं कला संसार का खजाना भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। प्राचीन काल से ही व्यापारिक स्वर्णिम मार्ग के ...

                                               

जैसलमेर की स्थापत्यकला

जैसलमेर के सांस्कृतिक इतिहास में यहाँ के स्थापत्य कला का अलग ही महत्व है। किसी भी स्थान विशेष पर पाए जाने वाले स्थापत्य से वहां रहने वालों के चिंतन, विचार, विश्वास एवं बौद्धिक कल्पनाशीलता का आभास होता है। जैसलमेर में स्थापत्य कला का क्रम राज्य की ...

                                               

जैसलमेर दुर्ग

जैसलमेर दुर्ग स्थापत्य कला की दृष्टि से उच्चकोटि की विशुद्ध स्थानीय दुर्ग रचना है। ये दुर्ग २५० फीट तिकोनाकार पहाडी पर स्थित है। इस पहाडी की लंबाई १५० फीट व चौडाई ७५० फीट है। रावल जैसल ने अपनी स्वतंत्र राजधानी स्थापित की थी। स्थानीय स्रोतों के अन ...

                                               

जैसलमेर में धर्म

भारतवर्ष की भूमि सदैव से धर्म प्रधान रही है, यहाँ पर धर्म के बिना जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती है। जैसलमेर राज्य का विस्तार भू-भाग भी इस भावना से मुक्त नहीं रहा।

                                               

जैसेलमेर की भाषा

जैसलमेर में बोली मुख्यतः राजस्थान के मारवा क्षेत्र में बोली जाने वाली मारवांी का एक भाग ही है। परन्तु जैसलमेर क्षेत्र में बोली जानेवाली भाषा थली या थार के रेगिस्तान की भाषा है। इसका स्वरुप राज्य के विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न है। उदाहरण स्वरुप ...

                                               

महावीर जैनालय, जैसलमेर

स्रोत - वाल्मीकि रामायण, यह मंदिर किले के लिए कर सकते हैं में स्थित है. महावीर स्वामी का यह मंदिर १४९३ ई. के बाद कि. अन्य मंदिरों की तुलना में इसकी वास्तुकला सरल है ।

                                               

रामकुंड, जैसलमेर

रामकुंड में महारावल अमरसिंह द्वारा १६९९ ई. में निर्मित वैष्णव मंदिर है। यहाँ के शिलालेख के अनुसार अमरसिंह की रानी सोधी मानसुखदे ने यह मंदिर का निर्माण सीताराम के लिए करवाया था। इस शिलालेख को महारावल जसवंतसिंह द्वारा १७०३ ई. में स्थापित किया गया थ ...

                                               

लक्ष्मीनाथ मंदिर, जैसलमेर

जैसलमेर दुर्ग में स्थित यह महत्वपूर्ण हिन्दु मंदिर है, जिसका आधार मूल रूप में पंचयतन के रूप में था। इस मंदिर का निर्माण दुर्ग के समय ही राव जैसल द्वारा कराया गया। मंदिर का सभामंडप किले के अन्य इमारतों का समकालीन है। इसका निर्माण १२ वीं शताब्दी मे ...

                                               

लौद्रवा जैन मंदिर, जैसलमेर

ऐसा माना जाता है कि लौद्रवा की स्थापना लोद्र् राजपूतों द्वारा की गई थी। बाद में यह भाटियों के कब्जें में आ गया था। लौद्रवा का जैन मंदिर कला की दृष्टि से बड़ा महत्व का है। दूर से ऊँचा भव्य शिखर तथा इसमें स्थित कल्पवृक्ष दिखाई पड़्ने लगते हैं। इस म ...

                                               

शांतिनाथ मंदिर, जैसलमेर

यह जुडवा मंदिर अपने खूबसूरत कलाकारी के लिए प्रसिद्ध है। खूबसूरत गढ़ी हुई मूर्तियाँ तथा पत्थर पर की गई नक्काशी, इस मंदिर को जैसलमेर की बहुमूल्य धरोहर बनाती है। निचलामंदिर कुंथुनाथ को समर्पित है, जो अष्टपद आधापर बना है। शांतिनाथ की प्रतिमा मंदिर के ...

                                               

शीतलनाथ मंदिर, जैसलमेर

संभवनाथजी मंदिर से सटा हुआ शीतलनाथ जी मंदिर है। इस मंदिर का रंगमंडप तथा गर्भगृह बहुत ही सटे हुए बने होने के कारण एक ही रचना प्रतीत होता है। मंदिर में सुंदर पत्थर की पच्चीकारी की गई है। इस मंदिर में नौ खण्डा पार्श्वनाथ जी व एक ही प्रस्तर में २४ ती ...

                                               

ॠषभदेव मंदिर, जैसलमेर

ॠषभदेव मंदिर चंद्रप्रभु मंदिर के समीप स्थित है। यह मंदिर १५ वीं शताब्दी में निर्मित है। ॠषभदेव का मंदिर तथा इसका शिखर अत्यंत कलात्मक एवं दर्शनीय है। इस मंदिर की एक विशेषता यह है कि यहाँ मुख्य सभी मण्डप के स्तंभों पर हिन्दु देवी-देवताओं का रुपांकन ...

                                               

घंटा घर (जोधपुर)

घंटा घर जिसे क्लॉक टावर के नाम से भी जाना जाता है। यह राजस्थान राज्य के जोधपुर ज़िले में स्थित है। इसका निर्माण जोधपुर के "सरदार सिंह" ने करवाया था। इसमें लोग खरीददारी करने के लिए आते हैं तथा यहाँ कई प्रकार की कीमती वस्तुएँ मिलती है। यहाँ पर देश ...

                                               

लूनी किला

चान्वा लूनी किला राजस्थान के जोधपुर शहर से २० किलोमीटर दूर स्थित एक किला है। लूनी की जागीर प्राप्त होने पर इसका निर्माण जोधपुरके कविराजा मुरारी दान आशिया भांडियावास ने करवाया था। इस किले को अब हैरिटेज होटल में परिवर्तित कर दिया गया है। किला व उसक ...

                                               

कोड़मदेसर

कोड़मदेसर बीकानेर से १५ मील पश्चिम में एक छोटा सा गांव है, जो इसी नाम के तालाब और उसके किनारे स्थापित भैरव की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। भैरव की मूर्ति जांगलू में बसने के समय स्वंय राव बीका ने मंड़ोर से लाकर यहां स्थापित की थी। यहां पर १६वीं तथा ...

                                               

खाजूवाला

खाजूवाला राजस्थान राज्य भारत का एक छोटा सा कस्बा है यह जिला बीकानेर में है यह कोई पुराना कस्बा नहीँ है इंदिरा गांधी नहर की अनूपगढ शाखा के आने से इस शहर का विकास हुआ खाजूवाला कस्बा का निर्माण लगभग 1980 में हुआ

                                               

छापर

यह बीकानेर से ७० मील पूर्व में बसा है और ऐतिहासिक दृष्टि से बड़े महत्व का है। यह मोहिलों की दो राजधानियों में से एक थी। उनकी राजधानी द्रोणपुर थी। मोहिल, चौहानों की ही एक शाखा है, जिसके स्वामियों ने राणा का विरुद्ध धारण कर उक्त स्थानों के आस-पास क ...

                                               

जांगलू

सांखलों का यह महान किला जांगलू नामक प्रदेश में बीकानेर से २४ मील दक्षिण में है। ऐसा कहते हैं कि चौहान सम्राट पृथ्वीराज की रानी अजयदेवी दहियाणी ने यह स्थान बसाया था। सर्व प्रथम सांखले महिपाल का पुत्र रायसी रुण को छोड़कर यहां आया और गुढ़ा बांधकर रह ...

                                               

जेगला

यह स्थान बीकानेर से २० मील दक्षिण में स्थित है। यहां पर उल्लेख योग्य गोगली सरदारों की दो देवलियां हैं। इनमें से अधिक प्राचीन ११ सिंतबर १५९० ई० की है तथा गोगली सरदार संसार से संबध रखती है। संसार के विषय में ऐसा प्रसिद्ध है कि वह बीकानेर के महाराजा ...

                                               

देवीकुंड, बीकानेर

नगर के पांच मील पूर्व में देवीकुंड है। यहां राव कल्याणसिंह से लेकर महाराजा डूंगरसिंह तक के राजाओं और उनकी रानियों और कुंवरों आदि की स्मारक छत्रियाँ बनी है जिनमें से कुछ तो बड़ी सुन्दर है। पहले के राजाओं आदि की छत्रियां दुलमेरा से लाए हुए लाल पत्थ ...

                                               

नाल, बीकानेर

बीकानेर से ८ मील पश्चिम में इसी नाम के रेलवे स्टेशन के निकट यह गांव है। इसके चारो ओर झाड़ियों और वृक्षों से अच्छादित सात-आठ छोटे-छोटे तालाब हैं। इसमें से एक तालाब के किनारे, जिसे केशोलय कहते हैं, एक लाल पत्थर का कीर्तिस्तंभ लगा है। यह १७वीं शताब् ...

                                               

पलाणा

बीकानेर से १४ मील दक्षिण में इसी नाम के रेलवे स्टेशन के पास बसा हुआ यह स्थान कोयले की खान के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर १४८२ ई० की एक देवली उल्लेखनीय है, जिससे जांगल देश में प्रथम अधिकार करने वाले राठौड़ों में से राव बीका के चाचा रिणमल के पुत्र मां ...

                                               

पांचु

बीकानेर से ३६ मील दूर दक्षिण में बसा यह गांव ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां राव बीका के तीसरे चाचा ऊधा रिणमलोत के दो पुत्रों पंचायण तथा सांगा की देवलियां हैं, जो क्रमश: १५११ और १५२४ ई० की हैं। अनुमानत: पंचायण ने यह गांव बसाया था और उसी के ...

                                               

पाखा

यह स्थान बीकानेर से लगभग २० मील दक्षिण में जेगला से करीब ४ मील पूर्व में है। यहां एक उल्लेखनीय छत्री है, जिसपर बीकानेर के राव जैतसी के एक पूत्र राठौड़ मानसिंह की मृत्यु और उसके साथ उसकी स्री कछवाही पूनिमादे के सती होने के विषय में १९ जून १५९६ ई० ...

                                               

पूनरासर बालाजी

पूनरासर राजस्थान प्रान्त का एक ग्राम है। पूनरासर बालाजी पूनरासर की पहचान है। पूनरास‍र धाम,हनुमानजी महाराज की असीम कृपावश सुदी‍र्घ भु-भाग मे विख्यात है | यह एक जागृत हनुमद स्थान है- हनुमानजी महाराज अपने भक्तो को सभी प्रकार के कष्टो से मुक्ति दिलाक ...

                                               

बीकानेर का इतिहास

बीकानेर । एक अलमस्त शहर है, अलमस्त इसलिए कि यहाँ के लोग बेफ़िक्री के साथ अपना जीवन यापन करते हैं। इसका कारण यह भी है कि बीकानेर के सँस्थापक राव बीकाजी अलमस्त स्वभाव के थे। अलमस्त नहीँ होते तो वे जोधपुर राज्य की गद्दी को यों ही बात-बात में नहीं छो ...

                                               

बीकानेर का भूगोल

बीकानेर राज्य के उत्तर में पंजाब का फिरोजपुर जिला, उत्तर-पूर्व में हिसार, उत्तर-पश्चिम में भावलपुर राज्य, दक्षिण में जोधपुर, दक्षिण-पूर्व में जयपुऔर दक्षिण-पश्चिम में जैसलमेर राज्य, पूर्व में हिसार तथा लोहारु के परगने तथा पश्चिम में भावलपुर राज्य थे।

                                               

बीकानेर किला

बड़ा किला अधिक नवीन है तथा इसका निर्माण महाराजा रायसिंह के समय हुआ था और शहरपनाह के कोट दरवाजे से लगभग ३०० गज की दूरी पर है। इसकी परिधि १०७८ गज है। भीतर प्रवेश करने के लिए दो प्रधान द्वार हैं, जिनके बाद फिर तीन या चार दरवाजे हैं। कोट में स्थान-स् ...

                                               

बीकानेर की चित्र शैली

राजस्थानी चित्रकला की एक प्रभावी शैली का जन्म बीकानेर राजस्थान के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। सुदूर मरुप्रदेश में राठौरवंशी राव जोधा के छठे पुत्र बीका द्वारा सन् १४८८ में बीकानेर की स्थापना की गई। बीकानेर २७ १२ और ३० १२ उत्तरी अक्षंश तथा ७२ १२ व ७ ...

                                               

बीकानेर की जलवायु

यहां की जलवायु सूखी, पंरतु अधिकतर अरोग्यप्रद है। गर्मी में अधिक गर्मी और सर्दी में अधिक सर्दी पडना यहां की विशेषता है। इसी कारण मई, जून और जुलाई मास में यहां लू बहुत जोरों से चलती है, जिससे रेत के टीले उड़-उड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर बन जाते ...

                                               

बीकानेर की जातियां

हिंदुओं में ब्राह्मण, राजपूत, महाजन,मेघवाल, सुथार,कायस्थ, जाट, चारण, भाट, सुनार, दर्जी, लुहार, खाती, कुम्हार, तेली, माली, नाई, धोबी, गूज्जर, कंजर, अहीर, गोंसाई, स्वामी, डाकोत, कलाल, लेखरा, छींपा, सेवक, भगत, भड़भूंजा, रैगर, मोची, चमार आदि कई जातिय ...

                                               

बीकानेर की संस्कृति

भेड़ो की अधिकता के कारण यहां ऊन बहुत होता है, जिसके कंबल, लाईयां आदि ऊनी समान बहुत अच्छे बनते है। यहां के गलीचे एवं दरियां भी प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त हाथी दांत की चूड़ियाँ, लाख की चूड़ियाँ तथा लाख से रंगी हुई लकड़ी के खिलौने तथा पलंग के पाये, ...

                                               

बीकानेर के दर्शनीय स्थल

नगर के मध्य में एक जैन मंदिर है जिसके मध्य से पाँच मार्ग निकले हैं, जो अन्य सड़कों से मिलते हुए शहरपनाह के किसी एक दरवाजे से जा मिलते हैं। कोट दरवाजे के बाहर अलखगिरि मतानुयायी लच्छीराम का बनवाया हुआ अलखसागर नाम का प्रसिद्ध कुआं है, जो बीकानेर के ...

                                               

मोरखाणा

यह स्थान बीकानेर से २८ मील दक्षिण-पूर्व में है। यहां का सुसवाणी देवी का मंदिर उल्लेखनीय है। यह मंदिर एक ऊँचे टीले पर बना है तथा इसमें एक तहखाना, खुला हुआ प्रांगण एवं बरामदा है। यह सारा जैसलमेरी पत्थरों का बना है और इसके तहखाने की बाहरी चाहरदीवारो ...

                                               

लाखासर

लाखासर राजस्थान के बीकानेर से ११० मील उत्तर में कुछ पूर्व की तरफ बसा है।गांव की स्थापना हरराज ने अपने पिता के नाम पर इसे बसाया था। ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान दो देवलियों के लिए प्रसिद्ध है। एक देवली १५४६ ई० की जो संभवत: राव बीका के चाचा लाखा रणम ...

                                               

लालगढ़ महल

लालगढ़ महल राजस्थान में बीकानेर का एक महल और विरासत का होटल है, जिसे १९०२ और १९२६ के बीच इंडो-सरैसेनिक शैली में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने अपने पिता महाराजा लालसिंह की स्मृति में बनवाया था। नगर के बाहर की इमारतों में लालगढ़ महल बड़ा भव्य है। ...

                                               

वासी -वरसिंहसर

यह गांव बीकानेर से १५ मील दक्षिण में है। यहां पर एक कीर्तिस्तंभ है, जिसपर पैंतीस पंक्तियों का एक महत्वपूर्ण लेख है। इससे पाया जाता है कि जंगलकूप के स्वामी शंखुकुल के कुमारसिंह की पुत्री जैसलमेर के राजा कर्ण की स्री दूलह देवी ने यहां १३२४ ई० में ए ...

                                               

वैष्णव मंदिर, बीकानेर

वैष्णव मंदिर राजस्थान के शहर बीकानेर में लक्ष्मीनारायण जी का मंदिर प्रमुख गिना जाता है। इस मंदिर का निर्माण राव लूणकर्ण ने करवाया था। इसके अतिरिक्त बल्लभ मतानुयायियों के रतन बिहारी और रसिक शिरोमणि के मंदिर भी उल्लेखनीय हैं। इनके चारों ओर अब सुंदर ...

                                               

अचलगढ़ किला व मंदिर

अचलगढ़ किला व मंदिर- दिलवाड़ा के मंदिरों से ८ किलोमीटर उत्तर पूर्व में यह किला और मंदिर स्थित हैं। अचलगढ़ किला मेवाड़ के राजा राणा कुंभ ने एक पहाड़ी के ऊपर बनवाया था। पहाड़ी के तल पर १५वीं शताब्दी में बना अचलेश्वर मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित ...

                                               

गोमुख मंदिर

गोमुख मंदिर - इस मंदिर परिसर में गाय की एक मूर्ति है जिसके सिर के ऊपर प्राकृतिक रूप से एक धारा बहती रहती है। इसी कारण इस मंदिर को गोमुख मंदिर कहा जाता है। संत वशिष्ठ ने इसी स्थान पर यज्ञ का आयोजन किया था। मंदिर में अरबुआदा सर्प की एक विशाल प्रतिम ...

                                               

खण्डार

खंडार कस्बा सवाई माधोपुर जिले के अंतर्गत आता है, यह राजस्थान का एक विधानसभा क्षेत्र है वही टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र में पड़ता है। यह कस्बा सवाई माधोपुर जिले से 47 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है एव यहां से 18 किलोमीटर की दूरी पर रामेश्वर धाम ...

                                               

भगवतगढ़

यह शहर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले से 25 किलोमीटर दूर स्थित है, जो कि खण्डार विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। चौथ का बरवाड़ा के बाद खण्डार विधानसभा क्षेत्र का द्वितीय सबसे बड़ा कस्बा भगवतगढ़ है। यहाँ के अरणेश्वर महादेव के सप्त कुंड पिकनिक मन ...

                                               

अम्बाला कैंट जंक्शन रेलवे स्टेशन

अम्बाला कैंट जंक्शन रेलवे स्टेशन भारतीय रेल का एक रेलवे स्टॆशन है। यह अंबाला छावनी शहर में स्थित है। यहाँ से भारत के हर कोने के लिये रेल गाड़ी उपलब्ध है

                                               

सेंट पॉल कैथेड्रल (अम्बाला)

सेंट पॉल कैथेड्रल भारत के राज्य हरियाणा के अम्बाला जिले की अम्बाला छावनी में स्थित एक गिरजाघर है, यह इस क्षेत्र के सबसे पुराने गिरजाघरों में से एक है। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तानी विमानों द्वारा की गयी बमबारी में इस गिरजाघर की इमारत ...

                                               

मानेसर

मानेसर भारत के हरियाणा राज्य के गुड़गांव जिले का एक तेजी से उभरता औद्योगिक शहर है, साथ ही यह दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर का एक हिस्सा भी है। यह एक सुशुप्त गाँव से भारत के एक सर्वाधिक तेजी से उभरते टाउनशिप में परिवर्तित हो चुका है। ...

                                               

यॉक स्कीइंग

याक स्कीइंग भारत के उत्तरी राज्य हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय पर्यटन स्थल मनाली में पर्यटक आकर्षण वाला एक खेल होता है। इस खेल में एक रस्सी का एक सिरा याक से दूसरा सिरा किसी व्यक्ति से बंधा होता और रस्सी पहाड़ी के चोटी से होकर गुजरती है। याक को लुभाकर ...

                                               

अमरौधा

अमरौधा कानपुर जिले का एक ब्लॉक है। मुख्यतः कानपुर देहात जिले में पड़ने वाली भोगनीपुर तहसील का मुख्य क़स्बा है। यह यमुना के तट पर बसा एक मिश्रित आवादी वाला दस हजार वोटर के साथ लगभग 6 हजार से ज्यादा घरो का मिलाजुला कई तालाबो से घिरा नगर पंचायत है।

                                               

कम्पनी बाग

कम्पनी बाग अंग्रेजों द्वारा शहर के बीचों बीच बसाया गया यह एक अनोखा बाग है। शायद ही किसी शहर के बीचों बीच इतना बड़ा पार्क मिले। इसकी विशालता का अनुमान लगाया जा सकता हैं कि इस बाग के अन्दर एक स्टेडियम, एक म्यूजियम, एक पुस्तकालय, तीन नसरियाँ, एक विश ...