ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 347




                                               

अश्वपति

अश्वपति भारत के प्राचीन इतिहास में कई राजाओं के नाम थे। मद्र देश का राजा, मालती - पति, पराशर द्वारा गायत्री व सावित्री जप विधान का कथन, सावित्री - सत्यवान् की कथा अश्वपति द्वारा पराशर से सावित्री पूजा विधान का श्रवण, सावित्री कन्या की प्राप्ति, स ...

                                               

उदयसिंह द्वितीय

उदयसिंह द्वितीय एक मेवाड़ के महाराणा थे और उदयपुर शहर के स्थापक थे जो वर्तमान में राजस्थान राज्य है। ये मेवाड़ साम्राज्य के ५३वें शासक थे उदयसिंह मेवाड़ के शासक राणा सांगा के चौथे पुत्र थे जबकि इनकी माता का नाम बूंदी की रानी, रानी कर्णावती था। अक ...

                                               

उदयादित्य

उदयादित्य पंवार, मालवा का राजा था जिसने जयसिंह के बाद राजधानी से मालवा पर राज किया। चालुक्यों से संघर्ष पहले से ही चल रहा था और उसके आधिपत्य से मालवा अभी हाल ही अलग हुआ था जब उदयादित्य लगभग १०५९ ई. में गद्दी पर बैठा। मालवा की शक्ति को पुन: स्थापि ...

                                               

उम्मेद सिंह (बहुविकल्पी)

कोटा के राजा। इनके पिता का नाम गुमानसिंह था। 1827 ई. में गुमानसिंह की मृत्यु हुई तो उम्मेदसिंह मात्र 10 वर्ष के थे। अत: कोटा राज्य के प्रधान मंत्री जालिमसिंह के संरक्षण में इन्होंने राजगद्दी सँभाली। जालिमसिंह ने मराठों के उत्पात से कोटा राज्य को ...

                                               

ओद्रक

ओद्रक, प्रसिद्ध शुंगवंश का पाँचवाँ राजा। इसका दूसरा नाम पुराणों में आद्रक भी मिलता है। उसके अनुसार उसने केवल दो वर्ष राज किया। संभवत: इसका एक और नाम काशीपुत्र भागभद्र भी था। इस नाम के साथ ओद्रक का एकीकरण संदेह से खाली नहीं है। तक्षशिला के ग्रीक र ...

                                               

क्षेत्र सिंह

खेता या क्षेत्र सिंह मेवाड़ साम्राज्य के शासक थे। इनके पिता का नाम राणा हम्मीर सिंह था जबकि इनके उत्तराधिकार राणा लखा हुए इन्होंने अजमेऔर मांडलगढ़ में शासन किया था।

                                               

चंडवर्मन् शालंकायन

शालंकायन वंश की राजधानी वेंगी थी जिसका समीकरण आधुनिक गोदावरी जिले में पेड्डवेगि नामक स्थान से किया जाता है। चंडवर्मन् का पिता नंदिवर्मन् प्रथम था। चंडवर्मन् का राज्यकाल चौथी शताब्दी के अंत और पाँचवीं शताब्दी के प्रारंभ में रखा जा सकता है। उसका स् ...

                                               

जंतर मंतर, वाराणसी

वाराणसी का जन्तर मन्तर एक वेधशाला है जिसका निर्माण सवाई जयसिंह ने १७३७ में कराया था। यह उन पाँच वेधशालाओं में से एक है जिसका निर्माण महाराजा जयसिंह द्वितीय ने कराया था।

                                               

जगदेव पंवार

महाराजा जगदेव परमार वंश के प्रसिद्ध राजा हुए । अदिलाबाद से प्राप्त अभिलेखानुसार- यशोदयादित्य नृप: पितासिदैव पितृव्यस्त च भोजराजः विरेजंतुयों वसुंधिपत्य प्राप्तप्रतिष्ठाविद पुष्पदंतो अर्थात- जिसका जगदेव पिता नरेश उदयादित्य था और भोजराज पितातुल्य थ ...

                                               

जगमाल सिंह

उदयसिंह की सबसे पसंदिता पत्नी रानी धीरबाई भटियाणी चाहती थी कि उदयसिंह के निधन के तत्पश्चात जगमाल को उत्तराधिकार बनाया जाए,इस कारण उदयसिंह ने जगमाल को अपना उत्तराधिकार बनाने के लिए तैयार हो गए थे और उनकी मृत्यु के बाद १५७२ में महाराणा प्रताप की जग ...

                                               

जयसिंह प्रथम (पूर्वी चालुक्य)

जयसिंह प्रथम विष्णुवर्धन का पुत्र था। कुब्ज विष्णुवर्धन के पश्चात वह गद्दी पर बैठा और ३२ वर्ष की लम्बी अवधि तक शासन किया। वह भागवत था। सर्वसिद्धि उसका विरुद था। उसके राज्यकाल की कोई राजनीतिक घटना विदित नहीं हैं। किंतु वह स्वयं विद्वान् था। असनपुर ...

                                               

जयसिंह सिद्धराज

गुजरात के चालुक्य नरेश कर्ण और मयणल्लदेवी का पुत्र जयसिंह सिद्धराज कई अर्थों में उस वंश का सर्वश्रेष्ठ सम्राट् था। सिद्धराज उसका विरुद था। उसका जन्म 1094 ई. में हुआ था। पिता की मृत्यु के समय वह अल्पवयस्क था अतएव उसकी माता मयणल्लदेवी ने कई वर्षों ...

                                               

तुकोजीराव होलकर द्वितीय

महाराजधिराज राज राजेश्वर सवाई श्री सर तुकोजी राव होलकर द्वितीय ताल - निफाड महाराष्ट्र 3 मई 1835 - महेश्वर 17 जून 1886) इंदौर के होलकर राज्य) के होलकर राजवंश से संबंधित महाराज थे। उनके जन्म का नाम श्रीमंत युकाजी जसवंत होलकर था। होलकर वंश की जमानत ...

                                               

दिनेश सिंह (राजनीतिज्ञ)

राजा दिनेश सिंह भारत के भूतपूर्व केन्द्रीय विदेश मंत्री थे। वे उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला की जानी मानी कालाकांकर राजघराने से ताल्लुक रखते थे। राजा अवधेश सिंह इनके पिता व राजकुमारी रत्ना सिंह इनकी पुती हैं।

                                               

प्रतापादित्य

प्रतापादित्य येशोर के राजा तथा भूस्वामी थे। उन्होने मुगलों के विरुद्ध युद्ध किया। अपने चरमोत्कर्ष के समय उनका राज्य वर्तमान पश्चिम बंगाल के नदिया, उत्तर चौबीस परगना और दक्षिण चौबीस परगना जिलों सहित वर्तमान बांग्लादेश में उत्तर में कुश्टिया जिले स ...

                                               

प्रथम नरसिंह देव

प्रथम नरसिंह देव पूर्वी गंगवंश के राजा थे जिन्होने उत्कल पर सन्१२३८ ई से १२६४ यतक शासन किया। उनके शासनकाल में प्रतिष्ठित मन्दिरों में कोणार्क का सूर्य मंदिर, बालेश्वर का राइबणिआ दुर्गसमूह, ढेङ्कानाळ का कपिळास शिव मन्दिर तथा रेमुणा का क्षीरचोरा गो ...

                                               

भोज का सैन्य जीवन

परमार राजा भोज ने ११वीं शताब्दी में शासन किया। उनकी राजधानी धारानगरी थी। उनका राज्यकाल लगभग १०१० ई॰ से १०५५ ई॰ तक माना जाता है किन्तु कुछ इतिहासकारों का मत है कि उनने १०१० के पूर्व ही सिंहासन प्राप्त कर लिया था। उनका राज्य मालवा में केन्द्रित था ...

                                               

भोजराज (चित्तौड़गढ़)

भोजराज राणा सांगा के सबसे बड़े पुत्र थे जो कि पश्चिमी भारत के मेवाड़ राज्य के एक शासक थे,मेवाड़ जो कि वर्तमान में राजस्थान में है। भोजराज मुख्यतः अपनी भक्ति कवि मीराबाई के पति होने के कारण जाने जाते थे।

                                               

मधुकरसाह बुन्देला

राजा मधुकरसाह बुंदेला के पिता प्रतापरुद्र या रुद्रप्रताप ने ओड़छा नगर की नींव डाली। मधुकरसाह ने सत्तारूढ़ होकर आस-पास की छोटी छोटी बस्तियों को अपने अधिकार में कर लिया। स्वाभिमान के कारण इसने मुगल सम्राट् अकबर के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। अकबर ने इ ...

                                               

मल्हारराव होलकर

मल्हारराव होलकर मराठा साम्राज्य का एक सामन्त था जो मालवा का प्रथम मराठा सूबेदार था। वह होलकर राजवंश का प्रथम राजकुमार था जिसने इन्दौपर शासन किया। मराठा साम्राज्य को उत्तर की तरफ प्रसारित करने वाले अधिकारियों में मल्हारराव का नाम अग्रणी है।

                                               

महाराजा जसवंत सिंह (मारवाड़)

महाराजा जसवंत सिंह मारवाड़ के शासक थे। वे राठौर राजपूत थे। वे एक अच्छे लेखक थे जिन्होने सिद्धान्त-बोध, आनन्दविलास तथा भाषाभूषण नामक ग्रंथों की रचना की।

                                               

यशवंतराव होलकर

यशवंतराव होलकर तुकोजीराव होलकर का पुत्र था। वह उद्दंड होते हुए भी बड़ा साहसी तथा दक्ष सेनानायक था। तुकोजी की मृत्यु पर उत्तराधिकार के प्रश्न पर दौलतराव शिंदे के हस्तक्षेप तथा तज्जनित युद्ध में यशवंतराव के ज्येष्ठ भ्राता मल्हरराव के वध के कारण, प् ...

                                               

राजा रामपाल सिंह

राजा रामपाल सिंह का जन्म भादों सुदी 4, संवत्‌ 1905 1848 ई. को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कालाकाकर राजपरिवार में हुआ। आपके पिता लाल प्रताप सिंह की मृत्यु आपके पितामह राजा हनुमंत सिंह के जीवनकाल में ही हो गई। अत: अपने बाबा के बउद राज्य के उत ...

                                               

राणा हम्मीर सिंह

राणा हम्मीर, या हम्मीरा जो १४वीं शताब्दी में भारत के राजस्थान के मेवाड़ के एक योद्धा या एक शासक थे। १३वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत ने गुहिलों की सिसौदिया राजवंश की शाखा को मेवाड़ से सत्तारूढ़ कर दिया था, इनसे पहले गुहिलों की रावल शाखा का शासन था ...

                                               

रामेश्वर सिंह (महाराजा)

महाराजा सर रामेश्वर सिंह ठाकुर दरभंगा के सन १८९८ से जीवनपर्यन्त महाराजा थे। अपने बड़े भ्राता के मृत्यु के उपरान्त वे महाराजा बने। वे १९७८ में भारतीय सिविल सेवा में भर्ती हुए थे और क्रमशः दरभंगा, छपरा तथा भागलपुर में सहायक मजिस्ट्रेट रहे। लेफ्टिने ...

                                               

राय होममल्ल

राय होममल्ल या राजा होममल्ल कालाकांकर राजवंश के संस्थापक थे। गोरखपुर का मझौली गांव इस राजवंश का मूल स्थान रहा है। वहां से चलकर मिर्जापुर के कान्तित परगना से होते हुए इस वंश के राय होममल्ल ने मानिकपुर से उत्तर बडग़ौ नामक स्थान पर अपना महल बनवाया थ ...

                                               

लक्ष्मीकर्ण

लक्ष्मीकर्ण, त्रिपुरी के कल्चुरी राजवंश का शासक था जिसे कर्ण भी कहते हैं। उसका राज्य वर्तमान मध्य प्रदेश के चेदि या दहल के आसपास केन्द्रित था।

                                               

वाक्पति (चन्देल)

वाक्पति 845 - 865 ई चन्देल राजवंश का एक शासक था। चन्देल शिललेखों से पता चलता है कि उसने क्षितिप की उपाधि धारण की थी। उससे सम्बन्धित दो शिलालेख खजुराहो से प्राप्त हुए हैं जिन पर विक्रम संवत १०११ ९५४ ई तथा विक्रम संवत १०५९ १००२ ई अंकित है। अपने पित ...

                                               

वीर विक्रम किशोर देव वर्मन

बीर बिक्रम किशोर माणिक्य देववर्मन बहादुर त्रिपुरी राज्य के अन्तिम महाराजा थे। त्रिपुरी राज्य के भारत में विलय के पूर्व वे ही त्रिपुरी के राजा थे।

                                               

वीर सिंह जूदेव

वीर सिंह जू देव, बुन्देलखण्ड के सबसे प्रतापी राजा थे । इन्होने बहुत किले व तालाबों का निर्माण अपने राज्यकाल में कराया। इन में सबसे प्रमुख है झाँसी का किला, दतिया का किला, दतिया में वीर सिंह महल, लक्ष्मी तालाब जुझार सागर, एरच दिनारा का तालाब, बरुआ ...

                                               

सम्भाजी

छत्रपती संभाजी राजे या शंभुराजे" 657-1689) मराठा सम्राट और छत्रपति शिवाजी महाराज के उत्तराधिकारी थे। उस समय मराठाओं के सबसे प्रबल शत्रु मुगल बादशाह औरंगजेब बीजापुऔर गोलकुण्डा का शासन हिन्दुस्तान से समाप्त करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही। संभाजी र ...

                                               

सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय

महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय सन १८७५ से १९३९ तक बड़ोदा रियासत के महाराजा थे। उन्होने अपने शासनकाल में वडोदरा की कायापलट कर दी थी। इनको भारतीय पुस्तकालय आंदोलन का जनक भी माना गया है इन्होने इस आन्दोलन की शुरुआत सन 1910 मे की थी गायकवाड़ एक दूरद ...

                                               

सिंहविष्णु

सिंहविष्णु पल्लव वंश का एक राजा था जिसने पल्लव वंश के गौरव का पुनः उत्थान किया। वह अवनिसिंह के नाम से भी प्रसिद्ध है। वह सिंहवर्मन तृतीय का पुत्र था। वह पहला पल्लव राजा था जिसका राज्य काँचीपुरम के दक्षिण तक पहुँच गया था। महेन्द्रवर्मन प्रथम द्वार ...

                                               

सीमुक

सीमुक अथवा सीमुख भारत का राजा था जिसने सातवाहन राजवंश की स्थापना की। पुराणों में वह सिशुक या सिन्धुक नाम से वर्णित है। पुराणों के अनुसार आंध्र सीमुख सुशर्मन् के अन्य भृत्यों की सहायता से काण्वायनों का नाम कर पृथ्वी पर राज्य करेगा। पुराणों द्वारा ...

                                               

हम्मीर चौहान

रााणा हम्मीर देव चौहान, पृथ्वीराज चौहान के वंशज थे। राजपूत परिवार से थे उन्होने रणथंभोपर १२८२ से १३०१ तक राज्य किया। वे रणथम्भौर के सबसे महान शासकों में सम्मिलित हैं। हम्मीर देव का कालजयी शासन चौहान काल का अमर वीरगाथा इतिहास माना जाता है। हम्मीर ...

                                               

मराठा साम्राज्य

मराठा साम्राज्य या मराठा महासंघ एक भारतीय साम्राज्यवादी शक्ति थी जो 1645 से 1818 तक अस्तित्व में रही। मराठा साम्राज्य की नींव छत्रपती शिवाजी महाराज ने 1645 में डाली। उन्होने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। बाद में आये पेशवाओनें ...

                                               

चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान

चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्विक उद्यान एक युनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जो कि भारत में स्थित है। इसे इस सूची में सन 2004 में सम्मिलित किया गया था। यहां वृहत स्तर पर उत्खनित पुरातात्विक, ऐतिहासिक एवं जीवित सांस्कइतिक धरोहर सम्पत्ति की बहुतायत है, जो क ...

                                               

चिरांद

छपरा से ११ किलोमीटर दक्षिण पूर्व में डोरीगंज बाजार के निकट स्थित चिरांद सारण जिला का सबसे महत्वपूर्ण पुरातत्व स्थल है। घाघरा नदी के किनारे बने स्तूपनुमा भराव को हिंदू, बौद्ध तथा मुस्लिम प्रभाव एवं उतार-चढाव से जोड़कर देखा जाता है। भारत में यह नव ...

                                               

पत्तदकल

पत्तदकल भारत के कर्नाटक राज्य में एक कस्बा है, जो भारतीय स्थापत्यकला की वेसर शैली के आरम्भिक प्रयोगों वाले स्मारक समूह के लिये प्रसिद्ध है। ये मंदिर आठवीं शताब्दी में बनवाये गये थे। यहाँ द्रविड़ तथा नागर दोनों ही शैलियों के मंदिर हैं। पत्तदकल दक् ...

                                               

बुर्ज़होम

बुर्ज़होम, श्रीनगर का पुरातात्विक महत्‍व वाला कश्‍मीर का प्रमुख ऐतिहासिक स्‍थल है। यहां पर कई प्राचीन भूमिगत गड्डे पाएं जाते हैं। इन गड्ढों को छप्परों से ढंक कर उनमें रहते थे। यहां के घरों का निर्माण जमीनी स्‍तर से ऊपर ईंट और गारे से भी किया जाता ...

                                               

इस्तमरारी बन्दोबस्त

स्थाई बन्दोबस्त को 1790 में जान शोर की व्यवस्था के नाम से शुरू किया गया था। जिसेे बाद में स्थाई बन्दोबस्त या इस्तमरारी बन्दोबस्त के नाम से जाना जाने लगा। इस्तमरारी बन्दोबस्त सन् १७९३ ई० में बंगाल के गवर्नर-जनरल लार्ड कार्नवालिस ने बंगाल में लागू ...

                                               

ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर

ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर ब्रिटिश साम्राज्य का सर्वोच्च सम्मान हुआ करता था। इसकी स्थापना किंग जार्ज पंचम ने की थी। अब राष्ट्रकुल देशों में ये एक प्रतिष्ठित सम्मान है। यह एक प्रकार का ऑर्डर ऑफ़ चिवैलरी है।

                                               

कुंवर चैन सिंह

कुंवर चैन सिंह मध्य प्रदेश में भोपाल के निकट स्थित नरसिंहगढ़ रियासत के राजकुमार थे, जो 24 जून 1824 को अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। 1857 के सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम से भी लगभग 33 वर्ष पूर्व की यह घटना कुंवर चैन सिंह को इस ...

                                               

जलियाँवाला बाग हत्याकांड

जालियाँवाला बाग हत्याकांड भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में १३ अप्रैल १९१९ हुआ था। रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ ...

                                               

पाँचवीं रिपोर्ट

सन् १८१३ में ब्रिटिश संसद में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिनमें से एक रिपोर्ट पाँचवी रिपोर्ट कहलाती थी। इस रिपोर्ट में भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के प्रशासन और क्रियाकलापों का वर्णन था। इस रिपोर्ट में जमींदारों और रैयतों की अर्जियाँ तथा ...

                                               

भाड़ा-पत्र

जब किसान ऋणदाता का कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाता है तो उसके पास अपना सर्वस्व -जमीन,गाड़ियाँ,पशुधन देने के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं था, लेकिन जीवनयापन हेतु खेती करना जरूरी था। इसलिए उसने ऋणदाता से जमीन, पशु या गाड़ी फिर किराए पर ले ली, इसके लिए उसे ...

                                               

भारत के सम्राट

”’भारत के सम्राट’”/”’साम्राज्ञी”, ”कैसर-ए-हिंद”, ”’ एम्परर/एम्प्रैस ऑफ इण्डिय”” वह उपाधि थी, जो कि अंतिम भारतीय मुगल शासक बहादुर_शाह_द्वितीय एवं भारत में ब्रिटिश राज के शासकों हेतु प्रयोग होती थी। कभी भारत के सम्राट उपाधि, भारतीय सम्राटों, जैसे म ...

                                               

रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर

कर्नल रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर ब्रिटिश सेना का एक अधिकारी था जिसे अस्थायी ब्रिगेडियर जनरल बनाया गया था जो पंजाब के शहर अमृतसर में जलियांवाला बाग़ नरसंहार के लिए उत्तरदायी था। डायर अपना पद से हटा दिया गया था, लेकिन वह ब्रिटेन में एक प्रसिद्ध नाय ...

                                               

कारगिल युद्ध

कारगिल युद्ध, जिसे ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है, भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के करगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है। पाकिस्तान की सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेख ...

                                               

सारागढ़ी का युद्ध

सारगढ़ी युद्ध १२ सितम्बर १८९७ को ब्रिटिश भारतीय सेना और अफ़्ग़ान ओराक्जजातियों के मध्य तिराह अभियान से पहले लड़ा गया। यह उत्तर-पश्चिम फ्रण्टियर प्रान्त में हुआ। ब्रिटिश सैन्यदल में ३६ सिख सिख रेजिमेंट की चौथी बटालियन के २१ सिख थे, जिन पर १२,००० अ ...