ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 314




                                               

असम साहित्य सभा

असम साहित्य सभा की स्थापना भारत के असम में सन् १९१७ में असमिया साहित्य एवं संस्कृति के अन्नयन के लिये की गयी थी। इस समय इसकी असम तथा अन्य राज्यों में एक हजार से भी अधिक शाखाएँ हैं। इसका मुख्यालय जोरहाट में है जो असम का ऐतिहासिक महत्व का नगर है।

                                               

बॉरगीत

बॉरगीत असम के नव वैष्णव धर्म के महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और माधवदेव के द्वारा रचित उच्च अध्यत्मिक भाव संपन्न, निर्दिष्ट राग विशिश्ट, एक विशेष ढंग से गाए जाने वाले गीत हैं। ब्रजावली भाषा मे रचित ये गीत श्री कृष्ण का गुणगान करते हैं। बाणिकान्त काको ...

                                               

मिरि जियोरी

मिरि जियोरी एक असमिया उपन्यास है जो रजनीकांत बोरदोलोई द्वारा लिखा गया है। यह पुस्तक तत्कालीन समसामयिक मिसिङ् समाज के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं और उनके रीति-रिवाजों और परंपराओं की एक श्रृंखला का खुलासा करती है। यह एक साधारण प्रेम कहानी पर आधारित एक सा ...

                                               

अल्ताफ़ फ़ातिमा

अल्ताफ़ फ़ातिमा एक अच्छी आलोचना की किताब है। एक कहानी-संग्रह वो जिसे चाहा गया भी प्रकाशित हो चुका है।

                                               

चोर मचाये शोर (1996 फ़िल्म)

चोर मचाये शोर उर्दू भाषा में बनी पाकिस्तानी फिल्म है, जिसका निर्देशन सैयद नूर ने किया है। इस फिल्म में बाबर अली, रेशम और साहिबा अफ़्ज़ल मुख्य किरदार में हैं। ये फिल्म सिनेमाघरों में 22 मार्च 1996 को पहली बार दिखागई थी।

                                               

चौदहवीं का चाँद

चौदहवीं का चाँद बॉलीवुड की एक फिल्म है जो 1960 में प्रदर्शित हुई। इसका निर्देशन मोहम्मद सादिक़ ने और निर्माण गुरु दत्त ने किया था। इसमें गुरु दत्त स्वयं वहीदा रहमान और रहमान के साथ मुख्य भूमिका में हैं। 1959 की कागज़ के फूल की असफलता के बाद ये गु ...

                                               

बेवफ़ा से वफ़ा

नगमा अदालत में रुखसार जूही चावला और असलम विवेक मुशरान की कहानी बताती है कि कैसे दोनों मिले और शादी करते हैं। रुखसार बच्चे को जन्म देने में असमर्थ होती है। इससे उनकी शादी में समस्याएँ शुरू होती हैं। इसके कारण वह नगमा से मदद मांगती है और उससे एक बच ...

                                               

कुल्लियात

कुल्लियात शायरी में किसी शायर की रचनाओं के संग्रह को कहते हैं। मसलन ग़ालिब की ग़ज़लों और नज्मों के संकलन को कुल्लियात-ए-ग़ालिब कहा जाता है। यह शब्द कुल से आया है, यानि शायर का कुल काम इस संग्रह में मौजूद होना चाहिए, लेकिन वास्तव में अगर शायर की क ...

                                               

पतंगा

शलभ, पतंगा या परवाना तितली जैसा एक कीट होता है। जीवविज्ञान श्रेणीकरण के हिसाब से तितलियाँ और पतंगे दोनों लेपीडोप्टेरा वर्ग के प्राणी होते हैं। पतंगों की १.६ लाख से ज़्यादा क़िस्में ज्ञात हैं, जो तितलियों की क़िस्मों से लगभग १० गुना हैं। वैज्ञानिक ...

                                               

गुजराती साहित्य

गुजराती भाषा आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं में से एक है और इसका विकास शौरसेनी प्राकृत के परवर्ती रूप नागर अपभ्रंश से हुआ है। गुजराती भाषा का क्षेत्र गुजरात, सौराष्ट्और कच्छ के अतिरिक्त महाराष्ट्र का सीमावर्ती प्रदेश तथा राजस्थान का दक्षिण पश्चिमी भाग ...

                                               

मालण

मालण गुजराती कवि थे। उन्हे गुजराती साहित्य में आख्यान काव्य का जन्मदाता माना जाता है। अपनी एक कृति में उन्होंने स्वयं लिखा है कि गुजरात की पुराणप्रिय जनता के संतोष के लिये ही गुजराती भाषा में संस्कृत के पौराणिक आख्यानों के लेखन का संकल्प उनके मन ...

                                               

सरस्वतीचन्द्र (उपन्यास)

सरस्वतीचन्द्र गोवर्धनराम माधवराम त्रिपाठी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध गुजराती उपन्यास है। जो 19 वीं सदी की पृष्ठभूमि में लिखा गया है। ये उपन्यास गुजरात में अत्यंत लोकप्रिय है। ये उपन्यास 15 साल की अवधि में लिखा गया था और १९८७ से १९०२ तक चार भाग में प ...

                                               

लज्जा (पुस्तक)

लज्जा तसलीमा नसरीन द्वारा रचित एक बंगला उपन्यास है। यह उपन्यास पहली बार १९९३ में प्रकाशित हुआ था और कट्टरपन्थी मुसलमानों के विरोध के कारण बांगलादेश में लगभग छः महीने के बाद ही इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। इस अवधि में इसकी लगभग पचास हजार प्रतियाँ ...

                                               

कपालकुण्डला

कपालकुंडला बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित बंगाली भाषा का एक प्रेम उपन्यास है। इसकी रचना १८६६ में हुई थी। इसमें कपालकुण्डला नामक एक वनवासी कन्या की कहानी है जो सप्तग्राम के नवकुमार नामक एक लड़के से प्यार करने लगती है और फिर उससे विवाह कर लेत ...

                                               

अमानुष

अमानुष 1975 में बनी फिल्म है, जो हिन्दी और बंगाली दोनों में बनी। यह शक्ति सामंत द्वारा निर्मित और निर्देशित है। फिल्म में शर्मिला टैगोर, उत्तम कुमार उत्पल दत्त और असित सेन हैं। दोनों संस्करण हिट रहे थे। फिल्म के बंगाली संस्करण ने बंगालियों के बीच ...

                                               

पथेर पांचाली (1955 फ़िल्म)

पाथेर पांचाली बंगाली सिनेमा की 1955 में बनी एक नाट्य फ़िल्म है। इसका निर्देशन सत्यजित राय ने एवं निर्माण पश्चिम बंगाल सरकार ने किया था। यह फ़िल्म बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। पाथेर पांचाली हिन्दी अनुवाद-पथगीत 1955 मे ...

                                               

राजकाहिनी

राजकाहिनी सृजीत मुखर्जी द्वारा निर्देशित एक बंगाली चलचित्र है। इस चलचित्र में बंगाल का विभाजन के समय का निदर्शन करता है। इस चलचित्र में ग्यारह प्रमुख महिला पात्र है और चलचित्र की कहानी एक कोठा के बारे में है जो नयी भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित था ...

                                               

आजकल

आजकल भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित हिन्दी पत्रिका का नाम है। यह पत्रिका पत्रिका भारत सरकार के प्रकाशन विभाग, पटियाला हाउस, नई दिल्ली से प्रकाशित होती है। आजकल भारत में प्रकाशित होने वाला एक बांग्ला भाषा का समाचार पत्र है। 1981 में इ ...

                                               

आनंद बाजार पत्रिका

आनंद बाजार पत्रिका बांग्ला भाषा का समाचार पत्र है जिसका प्रकाशन कोलकाता, नई दिल्ली एवं मुम्बई से एक साथ होता है। इसकी प्रतिदिन १२,७७,००० प्रतियाँ छपती हैं जो इसे भारत की क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार पत्रों में सबसे बड़ा बनाती हैं। इसी नाम से अंग्रे ...

                                               

आपला मानूस

आपला मानूस २०१८ में बनी मराठी भाषा की फिल्म है। आपला मनुस २०१८ के एक भारतीय चलचित्र फिल्म हे। यह मराठी भाषा में सतीश राजवाड़े द्वारा निर्देशित किया गया है। इस फिल्म के निर्माता अजय देवगन है। फिल्म के प्रमुख भूमिकाओं में नाना पाटेकर, इरावती हरशे औ ...

                                               

दादासाहब फालके

धुंडिराज गोविन्द फालके उपाख्य दादासाहब फालके वह महापुरुष हैं जिन्हें भारतीय फिल्म उद्योग का पितामह कहा जाता है। दादा साहब फालके, सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट से प्रशिक्षित सृजनशील कलाकार थे। वह मंच के अनुभवी अभिनेता थे, शौकिया जादूगर थे। कला भवन बड़ौ ...

                                               

ग्रामगीता

ग्रामगीता, तुकडोजी महाराज द्वारा मराठी भाषा में रचित एक महाकाव्य है जिसमें भारतीय ग्राम्य जीवन के विविध पक्षों का चित्रण है। यह काव्य ग्रामीण समुदाय के विकास के लिये एक आदर्श सन्दर्भ ग्रन्थ है। तुकडोजी महाराज जानते थे कि भारत गांवों में बसता है, ...

                                               

ज्ञानेश्वरी

ज्ञानेश्वरी महाराष्ट्र के संत कवि ज्ञानेश्वर द्वारा मराठी भाषा में रची गई श्रीमदभगवतगीता पर लिखी गई सर्वप्रथम भावार्थ रचना है। वस्तुत: यह काव्यमलेकनय प्रवचन है जिसे संत ज्ञानेश्वर ने अपने जेष्ठ बंधू तथा गुरू निवृत्तिनाथ के निर्देश पर किया था। इसम ...

                                               

आर्नोस पादरे

आर्नोस पादरे, जिन्हें फ़ादर हेंक्स्लेदेन के नाम से भी जाना जाता है, एक ईसाई मिशनरी थे। उनका जन्म ऑस्टरकप्पेल्न के निकट हुआ जो जर्मनी के हैनोवर के निकट ऑस्नाब्रूक में आता है। ईसाई धर्म का प्रचार करने वह भारत 1700 ईस्वी में आए थे।

                                               

चीन में संस्कृत

चीन में संस्कृत मुख्यतः ग्रीष्मकालीन शिविरों में सिखाया जाता है। बौद्ध भिक्षु जुआन जांग ने छठवीं शताब्दी में भारत की यात्रा की थी उसके बाद वे यहाँ संस्कृत और भारतीय चिकित्सा पद्धति सीख कर 17 वर्षों के बाद चीन वापस गए और इसी के साथ चीन में संस्कृत ...

                                               

जर्मनी में संस्कृत

जर्मनी में वर्ष 1800 में विलियम जोस ने प्राचीन भारत के प्रसिद्ध कवि कालीदास द्वारा लिखित अभिज्ञान शाकुंतलम का जर्मन भाषा में अनुवाद किया था। तब से वहाँ के लोगों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ी है। जर्मन भाषाविद इस बात से भी संस्कृत सीखने के ल ...

                                               

जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय

जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय राजस्थान के जयपुर में स्थित एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है। पहले इसका नाम राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय था। सम्पूर्ण संस्कृत वाङ्मय के सांगोपांग अध्ययन और अध्यापन का संचालन करने, सतत विशेषज्ञ ...

                                               

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश के वाराणसी नगर में स्थित एक संस्कृत विश्वविद्यालय है। यह पूर्वात्य शिक्षा एवं संस्कृत से सम्बन्धित विषयों पर उच्च शिक्षा का केन्द्र है। यह विश्वविद्यालय मूलतः शासकीय संस्कृत महाविद्यालय था जिसकी स्थ ...

                                               

सोमदेव

सोमदेव भट्टराव कथासरित्सागर के रचयिता हैं। वे कश्मीर के निवासी थे। सोमदेव के जीवन के बारे में कुछ भी पता नहीं है। उनके पिता का नाम राम था। सम्भवतः १०६३ और १०८१ के मध्य उन्होने रानी सूर्यमती के चित्तविनोद के लिये उन्होने इस महाग्रन्थ की रचना की। स ...

                                               

आचार्य किशोर कुणाल

आचार्य किशोर कुणाल सेवानिवृत भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी तथा संस्कृत अध्येता हैं। वे बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे पटना के महावीर मन्दिर न्यास के सचिव भी हैं। वे पटना के ज्ञान निकेतन नामक प्रसिद्ध विद्यालय के संस्थापक भी हैं।

                                               

आचार्य रामेश्वर झा

आचार्य रामेश्वर झा संस्कृत के विद्वान एवं न्याय, व्याकरण एवं वेदान्त के अधिकारी विद्वान थे। बाद में वे अद्वैत शैववाद के प्रतिपादक बन गये तथा वाराणसी में कश्मीरी शैव सम्प्राय का प्रचार-प्रसार किया।

                                               

आचार्य विश्वबन्धु शास्त्री

आचार्य विश्वबन्धु शास्त्री एक भारतीय वैदिक विद्वान, लेखक, शिक्षाविद और दयानन्द ब्राह्म महाविद्यालय के प्राचार्य थे, जो डी ए वी कॉलेज ट्रस्ट और प्रबन्धन सोसायटी के प्रबन्धन के तहत एक संस्थान था। १९६८ में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया।

                                               

उदयवीर शास्त्री

आचार्य उदयवीर शास्त्री भारतीय दर्शन के उद्भट विद्वान् थे। उन्होने कपिल मुनि के प्राचीन सांख्य, गोतम मुनि के न्याय पर बहुत शोधपरक काम किया है जिसके लिए सन् १९५० के दशक में उन्हें भारत के कई राज्यों से पुरस्कार मिले। अपने जीवन के तीसरे दशक मे वो ला ...

                                               

एन एस रामानुज ताताचार्य

१. शाब्दबोधमीमांसा २. कतिपयपदानां शक्तिविचारः ३. शाब्दबोधोपयोगिव्युत्पत्तीनां सोदाहरणं निरूपणम् ४. तर्कसंग्रहशाब्दबोधः ५. शाब्दबोधप्रक्रिया ६. पंचलक्षणी सिंहव्याघ्रलक्षणे च ७. तत्त्वचिन्तामणिः ८. प्रत्यक्षतत्त्वचिन्तामणिविमर्शः ९. तत्त्वचिन्तामणि ...

                                               

कपिलदेव द्विवेदी

डॉ कपिलदेव द्विवेदी वेद, वेदाङ्ग, संस्कृत व्याकरण एवं भाषाविज्ञान के अप्रतिम विद्धान थे। उन्होंने इन विषयों पर ७५ से अधिक ग्रंथ लिखे। आपने स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लिया था तथा ६ माह तक कठोर कारावास भोगा था। वे गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय क ...

                                               

चन्द्रकान्त बाली

पंडित चन्द्रकान्त बाली संस्कृत साहित्य मर्मज्ञ एवं कालगणना विशेषज्ञ माने जाते हैं। 1914 में मुलतान में जन्मे पं॰ बाली की गिनती मुलतान के चोटी के विद्वानों में होती थी। "प्रबंध पंचनद", "दोहा मानसरोवर", "पंजाब प्रान्तीय हिन्दी साहित्य का इतिहास", " ...

                                               

चिन्तामणि विनायक वैद्य

चिन्तामणि विनायक वैद्य संस्कृत के विद्वान तथा मराठी लेखक एवं इतिहसकार थे। कुछ समय तक वे ग्वालियर राज्य के मुख्य न्यायाधीश भी थे। १९०८ में उन्होने पुणे में मराठी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। बाद में बालगंगाधर तिलक के नेतृत्व वाली कांग्रेस ल ...

                                               

जयदेव वेदालंकार

डॉ॰ जयदेव वेदालंकार दर्शनशास्‍त्र, वैदिक साहित्य, धर्म और संस्‍कृति के उद्भट्ट विद्वान हैं। इन्‍होंने अनेक ग्रन्‍थों की रचना की है। वे गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के अनेक उच्‍च पदों जैसे डीन प्राच्‍यविद्या संकाय, प्रोफेसर एवं अध्‍यक्ष दर्शन विभ ...

                                               

जोनराज

जोनराज १५वीं सदी के एक कश्मीरी इतिहासकाऔर संस्कृत कवि थे। उन्होंने द्वितीय राजतरंगिणी नामक इतिहास-ग्रन्थ लिखा जिसमें उन्होंने कल्हण की राजतरंगिणी का सन् ११४९ तक का वृत्तान्त जारी रखते हुए अपने समकालीन सुल्तान ज़ैन-उल-अबिदीन​ उर्फ़ बुड शाह तक का व ...

                                               

ब्रह्मदत्त जिज्ञासु

पण्डित ब्रह्मदत्त जिज्ञासु संस्कृत के विद्वान तथा वैदिक साहित्य के शिक्षक था उसने राष्ट्रीय पण्डित की पदवी से सम्मानित किया गया था। और उसने संस्कृत पठन-पाठन की सरलतम विधि विकसित की थी जो पाणिनि के अष्टाध्यायी पर आधारित था।

                                               

महेश चन्द्र नारायण भट्टाचार्य

महामहोपाध्याय पण्डित महेश चन्द्र नारायण भट्टाचार्य संस्कृत के विद्वान तथा कोलकाता के संस्कृत कॉलेज के प्रधानाचार्य थे। वे ईश्वर चन्द्र विद्यासागर के मित्और सहकर्मी थे। उन्होने बंगाल के नवजागरण में महती भूमिका निभायी। १९वीं शताब्दी के कोलकाता के स ...

                                               

युधिष्ठिर मीमांसक

महामहोपाध्याय पंडित युधिष्ठिर मीमांसक संस्कृत के प्रसिद्ध विद्वान् तथा वैदिक वाङ्मय के निष्ठावान् समीक्षक थे। उन्होने संस्कृत के प्रचार-प्रसार में अपना अमूल्य योगदान दिया।

                                               

राजवीर शास्त्री

पण्डित राजवीर शास्त्री संस्कृत के विद्वान, अध्यापक, साहित्यकार तथा आर्यसमाज के कार्यकर्ता थे। मनुस्मृति में किए गये प्रक्षेपों पर अनुसन्धान करके उन्होने विशुद्ध मनुस्मृति नामक ग्रन्थ सम्पादित किया। आप दयाननद-सन्देश पत्र का अनेक वर्षों तक अवैतनिक ...

                                               

राम अवतार शर्मा

महामहोपाध्याय पण्डित राम अवतार शर्मा संस्कृत के विद्वान, भारतविद् तथा इतिहासकार थे। अपनी विद्वत्ता और तार्किकता के कारण वे पूरे देश में विख्यात थे। वे संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, लैटिन सहित भारत की अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होने ...

                                               

लुड्विक स्टर्नबाख्

डा. लुड्विक् स्टर्नबाख् अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा संस्कृत के प्रकाण्ड पण्डित थे। अनेक ग्रन्थों को लिखने पर भी आपने अपने जीवन में जो महान् कार्य किया वह था, उनका सम्पूर्ण संस्कृत साहित्य से सुभाषितों का संकलन। आपने भारत तथा विदेशों से उपलब्ध संस्क ...

                                               

वेंकटरमण राघवन

वेंकटरमण राघवन एक संस्कृत विद्वान तथा संगीतज्ञ थे। उन्हें पद्मभूषण, संस्कृत के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई पुरस्कार प्रदान किये गये थे। उन्होने १२० से अधिक पुस्तकों की रचना की तथा १२०० से अधिक लेख लिखे। इनके द्वारा रचित एक सौन्दर्यशास्त् ...

                                               

शिवकर बापूजी तलपदे

शिवकर बापूजी तलपदे एक भारतीय विद्वान थे। उन्होंने १८९५ में उन्होने मानवरहित विमान का निर्माण किया था वे मुम्बई के निवासी थे तथा संस्कृत साहित्य एवं चित्रकला के अध्येता थे।

                                               

शिवराज आचार्य कौण्डिन्न्यायन

शिवराज अाचार्य काैण्डिन्न्यायन विशिष्ट संस्कृत विद्वान्, वैदिक, शिक्षाशास्त्री, कल्पशास्त्रमर्मज्ञ, उत्कृष्ट भाषाशास्त्री, वैयाकरण, काेषकार, वेदांगज्याेतिषविद्, मीमांसक, वेदान्तज्ञ हैं। इन्हाेंने संस्कृत शिक्षा के सुधार के लिए लम्बा संघर्ष किया। ...

                                               

श्रीपाद कृष्ण बेलवेलकर

श्रीपाद कृष्ण बेलवलकर का जन्म सन्‌ 1880 में हुआ। बचपन में सारी शिक्षा दीक्षा राजाराम हॉयर स्कूल और कालेज, कोल्हापुर तथा डेक्कन कॉलेज, पूना, में हुई। कुशाग्र बुद्धि होने के कारण परीक्षाओं में उत्तम स्थान प्राप्त करते रहे। सन्‌ 1902 में बी. ए. उत्त ...

                                               

सम्पदानन्द मिश्र

सम्पदानन्द मिश्र भारत के एक संस्कृत-विद्वान हैं। वे मूलतः ओडिसा के निवासी हैं और सम्प्रति पुद्दुचेरी में रहते हैं जहाँ वे भारतीय सांस्कृतिक श्री अरविन्द फाउण्डेशन के निदेशक हैं। उनकी योजना वन्दे मातरम् पुस्तकालय शुरू करने की है जो मुक्तस्रोत तथा ...