ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 308




                                               

प्रेमानन्द भट्ट

प्रेमानन्द भट्ट गुजराती के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। वे प्रेमानन्द के नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं। गुजराती साहित्य में वे आख्यान के लिए प्रसिद्ध हैं जो काव्य का एक विशेष प्रकार है। प्रेमानंद के काव्य में गुजरात की आत्मा का पूर्णं प्रस्फुटन हुआ है। प्र ...

                                               

मोहम्मद मांकड

मोहम्मद मांकड गुजराती भाषा के जाने माने साहित्यकार हैं। उनका जन्म गुजरात में भावनगर जिले के पलियाड गाँव में हुआ था। उनके अनेक गुजराती उपन्यास और कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। गुजरात सरकार व अन्य संस्थाओं की ओर से उन्हें पुरस्कृत व सम्मानित भ ...

                                               

योगेश्वर

योगेश्वरजी बीसवीं सदी में गुजरात में उत्पन्न संत, योगी, दार्शनिक और साहित्यकार थे। हिमालय में जाकर कड़ी तपस्या करने के बाद समाज को आध्यात्म के मार्ग पर चलने के लिए उन्होंने मार्गदर्शन दिया।

                                               

रमणलाल वसंतलाल देसाई

रमणलाल वसंतलाल देसाई गुजराती भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उन्हें गुजराती साहित्य का "युगमूर्ति वार्ताकार कहा जाता है। साहित्यिक सौष्ठव और लोकप्रियता दोनों की दृष्टि से गुजरात के कथाकारों में उनका स्थान "मुंशी के बाद सर्वप्रमुख है। वे अनेक भाषा ...

                                               

वर्षा अडालजा

वर्षा अडालजा गुजराती की यशस्वी लेखिका हैं। इनके २० उपन्यास, ५ कहानी संग्रह, १ नाटक एवं १ निबंध संग्रह प्रकाशित हुए हैं। इन्होंने मित्रो मरजानी उपन्यास का गुजराती में अनुवाद भी किया। इनको प्राप्त पुरस्कारों की सूची में साहित्य अकादेमी पुरस्कार, सो ...

                                               

मनोज (डोगरी साहित्यकार)

मनोज डोगरी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कहानी–संग्रह पंदरां क्हानियां के लिये उन्हें सन् 2010 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

एर्राप्रेगड्डा

एर्राप्रेगड्डा एक तेलुगु कवि थे जिन्हे प्रबन्ध परमेश्वर की उपाधि से विभूषित किया गया था। वे राजा प्रोलया वेमा रेड्डी 1325–1353) के दरबारी कवि थे जो रेड्डी राजवंश के संस्थापक थे। वे कवित्रय में से एक हैं। ये कवि शंभुदास के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। ...

                                               

कंदुकूरि वीरेशलिंगम्

कंदुकूरि वीरेशलिंगम् तेलुगु साहित्य के आधुनिक काल के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं समाज सुधारक थे। उन्हें गद्य ब्रह्मा के नाम से ख्याति मिली। सनातनपंथी ब्राह्मण परिवार में जन्मे वीरेशलिंगम जाति-पांति के कट्टर विरोधी थे। कंदुकूरी वीरेशलिंगम ने जाति विरो ...

                                               

कवित्रय

तेलुगु के तीन कवियों को सम्मिलित रूप से कवित्रय कहते है, ये तीन कवि हैं- नन्नय्य, तिक्कन और एर्राप्रेगड्डा। कवित्रय ने महाभारत का संस्कृत से तेलुगु में अनुवाद किया।

                                               

के शिवा रेड्डी

के शिवा रेड्डी तेलुगु के सुप्रसिद्ध कवि हैं। उनका जन्म आंध्र प्रदेश के कारुमुरिवारी पालम गाँव में हुआ। उनके छे कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं। रक्तम सूर्युदु के लिए उन्हें फ्री वर्स फ़्रंट पुरस्कार से अलंकृत किया गया। १९८९ में उन्हें मोहना ओ मोहना ...

                                               

केतु विश्वनाथ रेड्डी

केतु विश्वनाथ रेड्डी तेलगु के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आन्ध्र प्रदेश के येरांगुटल में स्थित रंगसाइपुरम में १० जुलाई १९३९ का जन्में इस लेखक की ३६ पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं जिनमें केतु विश्वनाथ रेड्डी कथलु नामक कहानी-संग्रह एवं वरलु बोधि नामक उपन्य ...

                                               

गुरजाड अप्पाराव

अप्पाराव का जन्म आन्ध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम क्षेत्र में एक विद्वान परिवार में हुआ था।उनके पिता वेंकटरामदास संस्कृत और तेलुगु के विद्वान तथा वेदान्त तथा ज्योतिष के ज्ञाता थे। इनकी आरंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। विद्यालय में संस्कृत और दर्शन उनके प ...

                                               

तिक्कन

तिक्कन्न एक कवि थे। वे कवित्रयी में से एक थे जिन्होने शताब्दियों में महाभारत का तेलुगु में अनुवाद किया।

                                               

पोतना

बम्मेरा पोतना: आन्ध्र प्रदेश के एक प्रसिद्ध कवि थे। वरंगल जिले के पालाकुर्ति मण्डल मे बम्मेरा नाम के गाँव में उनका जन्म हुआ (यह अब तेलंगाना राज्य के जंगाँव जिले में है। पिता का नाम केसन्ना, और माता का नाम लक्कम्मा था। कड़ी गरीबी में दिन बिताए। बच ...

                                               

मुल्लपूडी वेंकट रमण

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से < सदस्य वार्ता:Sumaiya~hiwiki चित्र:Mullapudi venkata ramana.jpg Mullapudi venkata ramana चित्र:Mullapudi venkata ramana02.jpg Mullapudi venkata ramana02 मुल्लपूडी वेंकट रमण श्री मुल्लपूडी वेंकट रमण 1995 राजा-लक्ष् ...

                                               

कान्ह सिंह नाभा

भाई कान्ह सिंह नाभा उन्नीसवीं सदी के एक सिख विद्वान, कोशकाऔर लेखक थे जो अपने रचे विश्वज्ञानकोशीय ग्रंथ, महान कोश के लिये जाने जाते हैं। उनके लिखे ग्रंथ महान कोश को सिखमत, पंजाबी ज़बान और विरासत का विश्वज्ञानकोश का दर्जा हासिल है। उन्होंने सिंह सभ ...

                                               

धनीराम चातृक

धनीराम चातृक आधुनिक पंजाबी कविता के संस्थापक माने जाते हैं। आपकी कृतियाँ प्राचीन और अर्वाचीन पंजाबी काव्य की कड़ी हैं। आप ही सर्वप्रथम विद्वान्‌ हैं, जिन्हें साहित्यसेवा के उपलक्ष में 75वीं वर्षगाँठ पर अभिनंदन ग्रंथ समर्पित करके सम्मानित किया गया।

                                               

भाई वीरसिंह

भाई वीरसिंह आधुनिक पंजाबी साहित्य के प्रवर्तक; नाटककार, उपन्यासकार, निबंधलेखक, जीवनीलेखक तथा कवि। इन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में 1956 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।

                                               

प्रेमन्द्र मित्र

प्रेमन्द्र मित्र बंगाली भाषा के कवि और उपन्यासकार थे। उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए १९६१ में भारत सरकार ने पद्म श्री पुरस्कार से पुरस्कृत किया। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह सागर थेके फेरा के लिये उन्हें सन् 1957 में सा ...

                                               

अरविन्द विष्णु गोखले

अरविन्द विष्णु गोखले मराठी नव-कथा के प्रमुख हस्ताक्षर हैं। पुणे के कृषि महाविद्यालय में वनस्पित शास्त्र का अध्यापन किए एवं १९४० से कहानी लेखन प्रारम्भ किए। इन्होंने ६०० से अधिक कहानियाँ लिखीं, जो चालीस से अधिक संग्रहों में संकलित हैं। इसके अलावा ...

                                               

कृष्णाजी प्रभाकर खाडिलकर

कृष्णजी प्रभाकर खाडिलकर मराठी साहित्यकार, नाट्याचार्य, पत्रकार तथा लोकमान्य बालगंगाधर तिलक के सहयोगी थे। वे काका साहब खाडिलकर के नाम से विशेष प्रसिद्ध थे। एक महान् देशभक्त के रूप में आज भी उनका पर्याप्त सम्मान है। मराठी नाटय-सृष्टि में उन्होंने ब ...

                                               

गंगाधर गाडगीळ

गंगाधर गाडगीळ मराठी लेखक, अर्थतज्ज्ञ, समीक्षक। मराठी साहित्य में कथा साहित्य के योगदान के लिए उन्हें नव कथा के जन्मदाता कहा जाता है।

                                               

गजानन त्र्यंबक माडखोलकर

जन्म 28 दिसम्बर 1899 को बंबई में हुआ। आपने आरंभ में रवि-किरण-मंडल नामक कविसप्तक के सदस्य के नाते काव्यलेखन आरंभ किया। बाद में आलोचक के नाते अधिक ख्याति प्राप्त की। 1933 में आपने मुक्तात्मा नामक उपन्यास लिखकर मराठी में राजनीतिक उपन्यास लेखन की प्र ...

                                               

गोविन्द विनायक करंदीकर

गोविंद विनायक करंदीकर मराठी के प्रसिद्ध लेखक थे। वे विंदा करंदीकर के नाम से भी जाने जाते थे। मराठी भाषा के महान कवि करंदीकर को भारत के सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार ज्ञानपीठ से नवाजा गया था। वे कवि के साथ-साथ निबंधकाऔर आलोचक भी थे। उन्होंने महान यूना ...

                                               

नरसिंह चिंतामणि केलकर

इनका जन्म मिरज महाराष्ट्र में हुआ था। हाईस्कूल और कालेज में उन्होने अंग्रेजी एवं संस्कृत साहित्य का विशेष अध्ययन किया और उनकी साहित्यिक प्रतिभा पल्लवित हुई। बी. ए., एल-एल. बी. होने के पश्चात्‌ वे लोकमान्य तिलक के अंग्रेजी समाचार पत्र मराठा के संप ...

                                               

नागनाथ इनामदार

नागनाथ संतराम इनामदार, मराठी साहित्यकार थे। मराठी साहित्य में ऐतिहासिक उपन्यासकार के रूप में इनकी विशेष ख्याति रही है। मराठी के साथ-साथ ये हिन्दी में भी अत्यधिक लोकप्रिय रहे हैं।

                                               

नारायण सीताराम फड़के

नारायण सीताराम फड़के मराठी के साहित्यकार थे। उन्हे साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन १९६२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

                                               

बलवंत पांडुरंग अण्णा साहब किर्लोस्कर

बलवंत पांडुरंग अण्णा साहब किर्लोस्कर मराठी रंगमंच के आदि संगीत-नाटककार थे। आपका जन्म महाराष्ट्र के बेलगाँव जिले के एक गाँव में हुआ था। विद्याध्ययन के लिए 1863 में पूना भेजे गए किंतु संगीत और नाटक में आरंभ से ही रुचि होने के कारण स्कूली पढ़ाई में ...

                                               

मारुती चितम्पल्ली

रातवा, १९९३, १९९३-९४ का महाराष्ट्र राज्य साहित्य पुरस्कार निळावंती, २००२ घरट्यापलीकडे, १९९५ चकवाचांदण: एक वनोपनिषद, आत्मकथा पक्षी जाय दिगंतरा, १९८३ आनंददायी बगळे संस्कृत साहित्य के कुछ पक्षी, २००२ जंगलाचं देणं, १९८५, महाराष्ट्र राज्य साहित्य पुरस ...

                                               

मुकुन्दराज

मुकुंदराज मराठी भाषा के आदिकवि थे। वे नाथ सम्प्रदाय के सन्त थे तथा आदि शंकराचार्य के अद्वैमत के अनुयायी थे। उन्होने विवेक सिन्धु तथा परामृत नामक ग्रन्थों की रचना की। उनका जन्म वर्तमान समय के बीड जिला के आंबेजोगाई में हुआ था।

                                               

रणजीत देसाई

रणजीत रामचंद्र देसाई मराठी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके हिन्दी में अनूदित उपन्यास भी काफी लोकप्रिय रहे हैं।

                                               

विष्णु कृष्ण चिपलूणकर

विष्णु कृष्ण चिपलूणकर आधुनिक मराठी गद्य के युगप्रवर्तक साहित्यिकाऔर संपादक थे। श्री विष्णु शास्त्री चिपलूणकर का जन्म पूना के एक विद्वान् परिवार में हुआ। इनके पिता श्री कृष्ण शास्त्री अपनी स्वाभाविक बुद्धिमत्ता, रसिकता, काव्यप्रतिभा, अनुवाद करने क ...

                                               

शंकर केशव कानेटकर

शंकर केशव कानेटकर मराठी के सुप्रसिद्ध कवि। कानेतकर का जन्म 28 अक्टूबर 1893 ई. को फत्यापुर, रहिमतपुर, जिला सतारा में हुआ। आपने एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की और लेखनकार्य में जुट गए। अभागी कमल 1923 ई., अंबाराय 1928, कांचनगंगा 1930, चंद्रलेखा 1951 तथ ...

                                               

शिवराम महादेव परांजपे

शिवराम महादेव परांजपे मराठी के प्रतिभाशाली साहित्यकार, वक्ता, पत्रकाऔर ध्येयनिष्ठ राजनीतिज्ञ थे। उन्होने काल नामक साप्ताहिक द्वारा महाराष्ट्र में ब्रितानी शासन के विरुद्ध जनचेतना के निर्माण में सफलता पायी।

                                               

केरल वर्म्म

केरळवर्म्म वलिय कोयित्तम्पुरान् या केरलवर्म्म मलयालम कवि एवं अनुवादक थे जो संस्कृत एवं अंग्रेजी लेखन में भी उतने ही सिद्धहस्त थे। वे मालाबार के पराप्पनद के राजपरिवार के थे। उन्हें केरल का कालिदास कहा जाता है।

                                               

उग्रनारायण मिश्र "कनक"

उग्रनारायण मिश्र "कनक" मैथिली भाषा के रचनाकार हैं। कनक ने कहानी, कविता और निबंध जैसी विधाओं में रचनाकार्य किया है। मैथिली साहित्य मे इनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वर्ष २०१३ में इन्हें "वैदेह" सम्मान से विभूषित किया गया।

                                               

विद्यापति

विद्यापति भारतीय साहित्य की शृंगार-परम्परा के साथ-साथ भक्ति-परम्परा के प्रमुख स्तंभों मे से एक और मैथिली के सर्वोपरि कवि के रूप में जाने जाते हैं। इनके काव्यों में मध्यकालीन मैथिली भाषा के स्वरूप का दर्शन किया जा सकता है। इन्हें वैष्णव, शैव और शा ...

                                               

अवंतिसुन्दरी

अवंतिसुंदरी संस्कृत काव्यशास्त्र के प्रसिद्ध ग्रंथ काव्यमीमांसा के प्रणेता कविराज राजशेखर की धर्मपत्नी थीं। राजशेखर 880-920 ई. में वर्तमान थे। ये महाराष्ट्र प्रांत के मूल निवासी थे तथा लाट और कान्यकुब्ज देश में इनके जीवन का अधिक भाग व्यतीत हुआ था ...

                                               

आचार्य आनन्दवर्धन

आचार्य आनन्दवर्धन, काव्यशास्त्र में ध्वनि सम्प्रदाय के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं। काव्यशास्त्र के ऐतिहासिक पटल पर आचार्य रुद्रट के बाद आचार्य आनन्दवर्धन आते हैं और इनका ग्रंथ ‘ध्वन्यालोक’ काव्य शास्त्र के इतिहास में मील का पत्थर है। आचार्य ...

                                               

क्षेमराज

क्षेमराज एक दार्शनिक थे। वे अभिनवगुप्त के शिष्य थे। क्षेमराज तन्त्र, योग, काव्यशास्त्र तथा नाट्यशास्त्र के पण्डित थे। उनके जीवन एवं माता-पिता आदि के बारे में बहुत कम ज्ञात है। प्रत्याभिज्ञानहृदयम् नामक उनकी कृति का कश्मीर के त्रिक साहित्य में वही ...

                                               

चमु कृष्ण शास्त्री

चमू कृष्ण शास्त्री, संस्कृत भारती के सहसंस्थापक हैं। उन्होंने समस्त विश्व में संस्कृतभाषा के पुनर्जागरण के लिये संस्कृत भारती संस्था की स्थापना की। भारत सरकार ने उन्हें जनवरी २०१७ में पद्मश्री से सम्मानित किया। श्रीचमूकृष्णशास्त्री वैश्विक समुदाय ...

                                               

जीमूतवाहन

जीमूतवाहन के भारत के विधि एवं धर्म के पण्डित थे। स्मृतियों पर लिखने वाले वे बंगाल के सबसे पहले व्यक्तियों में से हैं। वे पारिभद्रकुल के ब्राह्मण थे। इन्होने दायभाग नामक ग्रंथ की रचना की।

                                               

धनिक

धनिक, नाट्यशास्त्र के ग्रंथ दशरूप के टीकाकार हैं। दशरूप के प्रथम प्रकाश के अंत में इति विष्णुसूनोर्धनिकस्य कृतौ दशरूपावलोके इस निर्देश से ज्ञात होता है कि धनिक दशरूपक के रचयिता, विष्णुसुत धनंजय के भाई थे। दोनों भाई मुंजराज के सभापंडित थे। मुँज और ...

                                               

नीलकंठ (शिवाचार्य)

नीलकंठ एक शिवाचार्य। नीलकंठ क्रियासार नामक वीर शैव ग्रंथ के लेखक थे। इस ग्रंथ की एक टीका १७३८ ई. में लिखी गई। कमलाकर भट्ट कृत निर्णयसिंधु में क्रियासार का उद्धरण है। मल्लणार्थ कृत कर्णाटक भाषा ग्रंथ वीर शैवाभूत महापुराण में इस ग्रंथ का उल्लेख है ...

                                               

मल्लिनाथसूरि

मल्लिनाथ, संस्कृत के सुप्रसिद्ध टीकाकार। इनका पूरा नाम कोलाचल मल्लिनाथ था। पेड्ड भट्ट भी इन्हीं का नाम था। ये संभावत: दक्षिण भारत के निवासी थे। इनका समय प्राय: 14वीं या 15वीं शती माना जाता है। ये काव्य, अलंकार, व्याकरण, स्मृति, दर्शन, ज्योतिष आदि ...

                                               

महिम भट्ट

महिम भट्ट "वक्रोक्तिजीवित" के रचयिता "कुंतक" के अनंतर ध्वनि सिद्धांत के प्रबल विरोधी के रूप में आचार्य महिम भट्ट का नाम संस्कृत साहित्य मे प्रथित है। इनका ग्रंथ "व्यक्तिविवेक" तीन विमर्शों में लिखा गया है। सभी प्रकार की ध्वनियों का अनुमान में अंत ...

                                               

मुकुल भट्ट

मुकुल भट्ट कश्मीर के यशस्वी विद्वान एवं सिद्ध आचार्य कल्लट के पुत्र थे। राजतरंगिणी के अनुसार भट्ट कल्लट कश्मीर नरेश अवंतिवर्मा के शासनकाल में वर्तमान थे। अवंतिवर्मा का समय सन् ८५७-८८४ ई॰ मान्य है अत: मुकुल भट्ट का समय नवीं शताब्दी का अंतिम चरण और ...

                                               

राजशेखर

राजशेखर काव्यशास्त्र के पण्डित थे। वे गुर्जरवंशीय नरेश महेन्द्रपाल प्रथम एवं उनके बेटे महिपाल के गुरू एवं मंत्री थे। उनके पूर्वज भी प्रख्यात पण्डित एवं साहित्यमनीषी रहे थे। काव्यमीमांसा उनकी प्रसिद्ध रचना है। समूचे संस्कृत साहित्य में कुन्तक और र ...

                                               

विद्याधर (साहित्यशास्त्री)

विद्याधर एकावली नामक ग्रंथ के रचयिता थे। एकावली साहित्यशास्त्र का महत्वपूर्ण एवं विवेचनात्मक ग्रंथ है। एकावली की कारिकाएँ उनपर वृत्ति और प्रयुक्त उदाहरण ग्रंथकार द्वारा निर्मित हैं। एकावली के आठ उन्मेष हैं। प्रथम उन्मेष में काव्यहेतु, काव्यलक्षण ...

                                               

शूद्रक

शूद्रक नामक राजा का संस्कृत साहित्य में बहुत उल्लेख है। ‘मृच्छकटिकम्’ इनकी ही रचना है। जिस प्रकार विक्रमादित्य के विषय में अनेक दंतकथाएँ प्रचलित हैं वैसे ही शूद्रक के विषय में भी अनेक दंतकथाएँ हैं। कादम्बरी में विदिशा में, कथासरित्सागर में शोभावत ...