ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 291




                                               

विश्व शास्त्रीय तमिल सम्मेलन २०१०

विश्व शास्त्रीय तमिल सम्मेलन २०१०, तमिल विद्वानों, शोधकर्ताओं, कवियों तथा ख्यातिलब्ध जनों का एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन है। यह २३ जून से २७ जून २०१० तक कोयम्बटूर में सम्पन्न हुआ।

                                               

शिलप्पदिकारम

शिलप्पादिकारम को तमिल साहित्य के प्रथम महाकाव्य के रूप में जाना जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ है- "नूपुर की कहानी"। इस महाकाव्य की रचना चेर वंश के शासक सेन गुट्टुवन के भाई इलांगो आदिगल ने लगभग ईसा की दूसरी-तीसरी शताब्दी में की थी। शिलप्पादिकारम की स ...

                                               

संगम साहित्य

यह तमिल भाषा के संगम साहित्य संबंधी लेख है। संगम के अन्य अर्थों के लिये यहां जाएं - संगम संगम साहित्य तमिल भाषा में पांचवीं सदी ईसा पूर्व से दूसरी सदी के मध्य लिखा गया साहित्य है। इसकी रचना और संग्रहण पांड्य शासकों द्वारा मदुरै में आयोजित तीन संग ...

                                               

भैरव अर्याल

राष्ट्रिय आह्वान लघुकाव्य, वि. सं. २०१८ इतिश्री हास्यव्यंग्य निबन्धसंग्रह, वि. सं. २०२८ नेपाली काव्यमा प्रकृति समालोचना, वि. सं. २०३० गलबन्दी हास्यव्यंग्य निबन्धसंग्रह, वि. सं. २०२६ उपवन कवितासंग्रह, वि. सं. २०१८ दश औतार हास्यव्यंग्य निबन्धसंग्रह ...

                                               

मुनामदन

मुनामदन नेपाली भाषा का सबसे ज्यादा बिकने वाला साहित्यिक कृति है। यह महाकाव्य झ्याउरे छन्द मैं नेपाली भाषा का महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा ने लिखा था। इस काव्य मुना और मदन नामक पति-पत्नी के जीवन को दर्शाता है। इस काव्य के मद्दत से लक्ष्मीप्रसाद दे ...

                                               

सेतो बाघ

सेतो बाघ नेपाली भाषा का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास है। यह उपन्यास डायमण्ड समशेर जंग बहादुर राणा ने लिखा था। इस उपन्यास नेपाल का राणा परिवार का उदय और पारिवारिक कलह से सम्बन्धित है।

                                               

पंजाबी साहित्य

पंजाबी साहित्य का आरंभ कब से होता है, इस विषय में विद्वानों का मतैक्य नहीं है। फरीद को पंजाबी का आदि कवि कहा जाता है ; किंतु यदि इस बात को स्वीकार किया जाय कि जिन फरीद की बाणी "आदि ग्रंथ" में संगृहीत है वे फरीद सानी ही थे तो कहना पड़ेगा कि 16वीं ...

                                               

पिंजर (उपन्यास)

पिंजर उल्लेखनीय कवयित्री और उपन्यासकार अमृता प्रीतम द्वारा 1950 में लिखित पंजाबी उपन्यास है। यह एक हिंदू लड़की, पूरो की कहानी है, जिसका एक मुस्लिम आदमी रशीद ने अपहरण कर लिया। जब वो रशीद के घर से अपने माता-पिता के घर भागती है तो उसके माता-पिता उस ...

                                               

लूणा

लूणा पंजाबी भाषा के विख्यात साहित्यकार शिवकुमार बटालवी द्वारा रचित एक काव्य–नाटक है जिसके लिये उन्हें सन् 1967 में पंजाबी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

                                               

वार (पंजाबी काव्य)

वार पंजाबी साहित्य का एक काव्यभेद, जो वर्णनात्मक शैली में लिखा जाता है। "वार" शब्द संस्कृत की "वृ धातु से व्युत्पन्न है। "कीर्ति, "घेरा, "धावा, "बार बार, बाह्य प्रभृति "वार शब्द के अर्थ अनुमित हुए हैं। किंतु रूढ़ अर्थों में यह युद्ध संबंधी काव्य ...

                                               

अन्नदामंगल

अन्नदामंगल, या नूतनमंगल, भारतचन्द्र राय द्वारा १७५२-५३ में रचित एक बंगाली काव्य है। इसमें अन्नपूर्णा देवी का महात्म गाया गया है। सम्पूर्न काव्य तीन खण्डों में विभक्त है- २ विद्यासुन्दर या कालिकामंगल, ३ मानसिंह या अन्नपूर्णामंगल। १ अन्नदामंगल या अ ...

                                               

चरित्रहीन

चरित्रहीन बांग्ला के महान उपन्यासकार शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित एक जनप्रिय बांग्ला उपन्यास है। यह उपन्यास १९१७ ई में प्रकाशित हुआ था। इसमें मेस जीवन के वर्णन के साथ मेस की नौकरानी से प्रेम की कहानी है। नारी का शोषण, समर्पण और भाव-जगत तथा ...

                                               

चोखेर बाली (उपन्यास)

चोखेर बाली रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा लिखी गई एक उपन्यास है। उपन्यास की केन्द्रीय किरदार बिनोदिनी एक युवा विधवा है,जो समाज के दुर्व्यवहार के कारण नरकी ज़िन्दगी जीने को मज़बूर है। वह तंग आकर अपनी इस हालत के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति से बदला लेने का निर ...

                                               

तबे एकला चलो रे

जोदि तोर दक शुने केऊ ना ऐसे तबे एकला चलो रे ", सामान्यतः इसे एकला चलो रे से जाना जाता है, एक बंगाली देशभक्ति गीत है जिसे १९०५ में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने लिखा था।

                                               

दुर्गेशनन्दिनी

दुर्गेशनन्दिनी बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित प्रथम बांग्ला उपन्यास था। सन १८६५ के मार्च मास में यह उपन्यास प्रकाशित हुआ। दुर्गेशनन्दिनी बंकिमचन्द्र की चौबीस से लेकर २६ वर्ष के आयु में लिखित उपन्यास है। इस उपन्यास के प्रकाशित होने के बाद बा ...

                                               

देशेर कथा

देशेर कथा महान क्रान्तिकारी विचारक एवं लेखक सखाराम गणेश देउस्कर द्वारा लिखित क्रांतिकारी बांग्ला पुस्तक है। सन् 1904 में ‘देशेर कथा’ शीर्षक से प्रकाशित यह पुस्तक ब्रिटिश साम्राज्य में गुलामी की जंजीरों में जकड़ी और शोषण की यातना में जीती-जागती भा ...

                                               

निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन

निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन बांग्ला भाषा का वार्षिक सम्मेलन है जिसमें भारत के बांग्ला भाषा के साहित्यकार भाग लेते हैं। इसका प्रथम सम्मेलन सन १९२३ में वाराणसी में हुआ था और उस समय इसका नाम प्रवासी बंग-साहित्य सम्मेलन था जिसकी अध्यक्षता रवीन्द्र ...

                                               

नीलदर्पण

नीलदर्पण बांग्ला का प्रसिद्ध नाटक है जिसके रचयिता दीनबन्धु मित्र हैं। इसकी रचना १८५८-५९ में हुई। यह बंगाल में नील विद्रोह का अन्दोलन का कारण बना। यह बंगाली रंगमंच के विकास का अग्रदूत भी बना। कोलकाता के नेशनल थिएटर में सन् १८७२ में खेला गया यह पहल ...

                                               

बंगीय साहित्य परिषद

बंगीय साहित्य परिषद, बंगाल की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था है। १८९३ ई के जुलाई मास की २३ तारिख को बेंगाल एकेडेमि ऑफ लिटरेचर नामक जो सभा स्थापित हुई, उसी का नाम परिवर्तन करके १३०१ बंगाब्द को बंगीय साहित्य परिषत् कर दिया गया। विभिन्न उपायों द्वारा बां ...

                                               

बेहुला

सती बेहुला या बिहुला या बेहुला मध्यकालीन बांग्ला साहित्य में मनसामंगल एवं इसी प्रकार के कई अन्य काव्यकृतियों की नायिका है। तेरहवीं से अट्ठारहवीं शती की अवधि में इस कथा पर आधारिक बहुत सी रचनाएं की गयीं। इन कृतियों का धार्मिक उद्देश्य मनसा देवी की ...

                                               

ब्योमकेश बक्शी

ब्योमकेश बक्शी शरदेन्दु बन्द्योपाध्याय द्वारा रचित बांग्ला जासूसी गल्प है। इसकी रचना आर्थर कोनन डायल द्वारा रचित महान साहित्यिक जासूस शरलोक होम्स से प्रेरणा लेकर हुई है। शरदेन्दु जी ने 1942 से 1970 के मध्य ब्योमकेश बक्शी की 32 कहानियाँ लिखी किन्त ...

                                               

भानुसिंह ठाकुरेर पदावली

भानुसिंह ठाकुरेर पदाबली रबीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित एक काव्यग्रन्थ है। यह ब्रजबुलि में है। रबीन्द्रनाथ अपनी किशोरावस्था में "भानुसिंह" के छद्मनाम से वैष्णव कवियों का अनुकरण करते हुए कुछ पद रचना किए थे। वर्ष १८८४ में वे कविताएँ भानुसिंह ठाकुरेर ...

                                               

मंगलकाव्य

मङ्गलकाव्य साधारणतः किसी हिन्दू देवता या देवी पर केन्द्रित होता है। ये देवी या देवता मूलतः बंगाल के स्थानीय देवी-देवता थे जैसे, मनसा। इस कारण इनका वेद पुराण आदि ग्रन्थों में उल्लेख नहीं मिलता।

                                               

मनसामंगल

मनसामंगल काव्य सभी मङ्गल-काव्यों में सबसे प्राचीन काव्य है। इसमें सर्प-देवी मनसा द्वारा बंगाल के शिवभक्तों को शिवभक्ति छोड़कर अपनी भक्ति कराने का वर्णन है। मनसा जनजातीय लोगों द्वारा पूजित एक देवी थीं जो बाद में बृहद हिन्दू समाज की देवी के रूप में ...

                                               

वैष्णव पदावली

बंगला साहित्य में वैष्णव कवियों द्वारा १५वीं शताब्दी से लेकर १७वीं शताब्दी तक रचित साहित्य वैष्णब पदावली नाम से जाना जाता है। इसमें प्रधानतः राधा और कृष्ण की प्रेमलीला को आधार बनाकर साहित्य रचा गया। यह आन्दोलन विद्यापति और चण्डीदास से आरम्भ हुआ, ...

                                               

अम्मा

अम्मा भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1934 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ और इसका द्वितीय संस्करण 1970 में आया।

                                               

कूप्पुकई

कूप्पुकई भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1930 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ और द्वितीय संस्करण 1970 में आया।

                                               

छप्पन कविताएं-बालमणि अम्मा

छप्पन कविताएं भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का की छ्प्पन मलयाली कविताओं का हिन्दी में अनुवाद का संग्रह है, जो भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन द्वारा 1971 में पहली बार प्रकाशित किया गया।

                                               

निवेदया

निवेदया भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा के मलयाली कविता संग्रह निवेद्यम का हिन्दी में अनुवाद है, जो वर्ष 2003 में प्रकाशित हुआ।

                                               

निवेद्यम

निवेद्यम भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1987 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ।

                                               

प्रणामम

प्रणामम भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1954 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ।

                                               

मज़्हुवींट कथा

मज़्हुवींट कथा भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1966 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ।

                                               

मलयालम साहित्य की दादी

मलयालम साहित्य की दादी एक लोक अलंकरण है, जो मलयाली कवयित्री बालमणि अम्मा को कहा जाता है। आधुनिक मलयालम की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें मलयालम साहित्य की दादी कहा जाता है।

                                               

मलयालम साहित्यकार

माधवन् पुऱच्चेरि ऎ.सि. श्रीहरि पि.ऎ.अनिष् मोहनकृष्णन् कालटि सि.श्रीकुमार् पि. रामन् पवित्रन् तीक्कुनि अन्वर् षा उमयनल्लूर् ऎं आर् विष्णुप्रसाद्‌ कुरीप्पुऴ श्रीकुमार् ऎं.ऎस्.बने‍ष्‍ विष्णुप्रसाद्‌ ऱफीक्क् अहम्मद् टि.पि. राजीवन् लतीष् मोहन् पि.पि.र ...

                                               

मार्ताण्ड वर्मा (उपन्यास)

मार्ताण्ड वर्मा, केरल का साहित्यकार सी॰ वी॰ रामन् पिल्लै का १९८१ में प्रकाशित हुआ एक मलयालम उपन्यास है। राजा रामा वर्मा के अंतिम शासनकाल से मार्ताण्ड वर्मा का राज्याभिषेतक वेणाट का इतिहास आख्यान करना एक अतिशयोक्तिपूर्ण कथा रूप में ही इस उपन्यास प ...

                                               

मुथास्सी

मुथास्सी भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1962 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ।

                                               

लोकांठरांगलील

लोकांठरांगलील भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1955 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ।

                                               

वाला

वाला, भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का कविता संग्रह है, जो वर्ष 2010 में प्रकाशित हुआ।

                                               

संध्या (पुस्तक)

संध्या भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1982 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ।

                                               

स्त्री हृदयम

स्त्री हृदयम भारत से मलयालम भाषा की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक नालापत बालमणि अम्मा का काव्य संग्रह है, जो 1939 में पहली बार मलयालम भाषा में प्रकाशित हुआ।

                                               

ख्यात

ख्यात इतिहास-सम्बन्धी साहित्य है जिसके लेखन का प्रचलन भारत के उन क्षेत्रों में था जिसे आजकल राजस्थान के नाम से जाना जाता है। अर्थात ख्यात ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। कुछ प्रसिद्ध ख्यात निम्नलिखित हैं- बांकीदास री ख्यात जोधपुर राज्य री ख्यात, मारवाड़ र ...

                                               

राजस्थानी साहित्य

राजस्थानी साहित्य ई॰ सन् १००० से विभिन्न विधाओं में लिखी गई है। लेकिन सर्वसम्मत रूप से माना जाता है कि राजस्थानी साहित्य पर कार्य सूरजमल मिश्रण के कार्य के बाद आरम्भ हुआ। उनका मुख्य कार्य वंस भास्कर और वीर सतसई में है। वंस भास्कर राजपूत राजकुमारो ...

                                               

अंशुबोधिनी

अंशुबोधिनी महर्षि भरद्वाज द्वारा रचित एक ग्रन्थ है। इसमें सूरज से प्राप्त ऊर्जा के विभिन्न उपयोग बताये गये हैं। इसमें बिना तार के सन्देश भेजने की बात भी कही गयी है।

                                               

अनंगरंग

अनंगरंग, कल्याणमल्ल प्रणीत एक कामशास्त्रीय ग्रन्थ जिसमें मैथुन संबंधी आसनों का विवरणी है। ४२० श्लोकों एवं १० स्थल नामक अध्यायों में विभक्त यह ग्रन्थ भूपमुनि के रूप में प्रसिद्ध कलाविदग्ध क्षत्रिय विद्वान कल्याणमल्ल द्वारा अपने घनिष्ठ मित्र लोदीवं ...

                                               

अमरकोश

अमरकोश संस्कृत के कोशों में अति लोकप्रिय और प्रसिद्ध है। इसे विश्व का पहला समान्तर कोश कहा जा सकता है। इसके रचनाकार अमरसिंह बताये जाते हैं जो चन्द्रगुप्त द्वितीय के नवरत्नों में से एक थे। कुछ लोग अमरसिंह को विक्रमादित्य का समकालीन बताते हैं। इस क ...

                                               

आदि शंकराचार्य की कृतियाँ

आदि शंकराचार्य ने बहुत से गर्न्थों की रचना की जो अद्वैत वेदान्त के आधार स्तम्भ हैं। उनकी कृतियों में अद्वैत वेदान्त की तर्कपूर्ण स्थापना हुई है। परम्परागत रूप से आदि शंकराचार्य की कृतियों को तीन समूहों में रखा जाता है- स्तोत्र स्तुति के लिए श्लोक ...

                                               

आपस्तम्ब धर्मसूत्र

आपस्तम्बीय कल्प के 30 प्रश्नों में से 28वें तथा 29वें प्रश्नों को आपस्तम्ब धर्मसूत्र नाम से अभिहित किया जाता है। ये दोनों प्रश्न 11–11 पटलों में विभक्त है, जिनमें क्रमशः 32 और 29 कण्डिकायें प्राप्त हैं।

                                               

ईश्वरविलास महाकाव्य

सवाई जयसिंह के समकालीन, बूंदी और जयपुर के राजदरबारों से सम्मानित, आन्ध्र-तैलंग-भट्ट, संस्कृत और ब्रजभाषा के महाकवि, श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि द्वारा रचित, राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान जोधपुर द्वारा प्रकाशित ईश्वरविलास महाकाव्यजयपुर के इतिहास ...

                                               

करणकौतूहल

करणकौतूहल, भास्कराचार्य द्वारा लिखित एक ग्रन्थ है। भास्कराचार्य अपने समय के सुप्रसिद्ध गणितज्ञ थे। करणकौतूहल से पहले इन्होनें सिद्धान्त शिरोमणि नामक एक और ग्रन्थ की रचना की थी। करणकौतूहल में खगोलवैज्ञानिक गणनाएँ हैं। पंचांग आदि बनाने के समय इसे अ ...

                                               

करणकौस्तुभ

करणकौस्तुभ कृष्ण दैवज्ञ द्वारा शक संवत् १५७५ संस्कृत में रचित खगोलशास्त्र का ग्रन्थ है। इसकी रचना छत्रपति शिवाजी के लिये की गयी थी। यह ग्रन्थ गणेश दैवज्ञ के ग्रहलाघव पर आधारित है। इसमें १४ अधिकरण हैं- ग्रहणद्वयसाधन नक्षत्रछाया उदयास्त त्रिप्रश्न ...