ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 255




                                               

अहिरवाड़ा

अहिरवाड़ा मध्य भारत या आधुनिक मध्य प्रदेश में पार्वती और बेतवा नदियों के बीच स्थित एक ऐतिहासिक क्षेत्र है। अहिरवाड़ा राज्य भिलसा और झांसी शहरों के बीच स्थित था।

                                               

अहीरवाल

अहीरवाल एक ऐसा क्षेत्र है जो दक्षिणी हरियाणा और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के हिस्सों में फैला हुआ है, जो भारत के वर्तमान राज्य हैं। यह क्षेत्र एक बार रेवाडी के शहर से नियंत्रित रियासत थी और मुगल साम्राज्य के पतन के समय से अहीर समुदाय के सदस्यों द्वार ...

                                               

ईश्वरसेन

ईश्वरसेन आभीर साम्राज्य के संस्थापक थे। पुराणों में वर्णन के अनुसार ईश्वरसेन व उनके उत्तराधिकारियों ने दक्खिन की वृहद सीमाओं पर शासित रहे थे. उन्होने राजन की उपाधि गृहण की तथा भारतीय काल गणना संवत भी उनके नाम पर शुरू की गयी थी। उनके बाद उनकी नौ प ...

                                               

चूरामन अहीर

गोंड इतिहास में अहीरों का नाम बार-बार आता है। मंडला, जबलपुर, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, बेतूल व नागपुर के समस्त इलाके गोंड साम्राज्य के कब्जे में आ गए थे, जो कि पहले नागवंशियों, अहीर राजाओं व कुछ अन्य राजपूतों के कब्जे में थे। गोंड साम ...

                                               

नंदवंशी

नंदवंशी शब्द नन्द या नंदगोप नामक प्रसिद्ध पौराणिक चरित्र के वंशजों का परिचायक है। हरिवंश पुराण के अनुसार - नन्द "पावन ग्वाल" नाम से परिभाषित गोपालक या गोप जाति के मुखिया थे। वासुदेव नवजात कृष्ण के जन्म की रात को ही पालन पोषण हेतु नन्द को सौंप कर ...

                                               

फाटक

फाटक, अहीर जाति का एक वंश या उपजाति है, जो कि राजपूतों के काफी समरूप होते है व स्वयं को चित्तौड़ के एक सिसोदिया राज कुमार का वंशज मानते हैं। इस सिसोदिया राजकुमार का विवाह महाबन के अहीर राजा दिग्पाल की पुत्री से हुआ था। अतः यह अहीर कहे जाते हैं।

                                               

यदुवंश

यदुवंश अथवा यदुवंशी क्षत्रिय शब्द भारत के उस जन-समुदाय के लिए प्रयुक्त होता है जो स्वयं को प्राचीन राजा यदु का वंशज बताते हैं। तिजारा के खानजादा मुस्लिम भी अपनी उत्पत्ति यदुवंशी राजपूतों से बताते हैं। मैसूर साम्राज्य के हिन्दू राजवंश को भी यादव क ...

                                               

राव तुला राम

राव तुलाराम सिंह 1857 का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हे हरियाणा राज्य में राज नायक" माना जाता है। विद्रोह काल मे, हरियाणा के दक्षिण-पश्चिम इलाके से सम्पूर्ण बिटिश हुकूमत को अस्थायी रूप से उखाड़ फेंकने तथा दिल ...

                                               

राव रूड़ा सिंह

एक जंगली इलाके की जागीर को तिजारा के कुलीन अहीर शासक राव रुडा सिंह ने रेवाड़ी राज्य के रूप मे स्थापित किया था। यह जागीर उन्हें मुगल शासक हुमायूँ को मेधावी सैन्य सेवाओं के बदले में वर्ष 1555 में प्राप्त हुयी थी। राव रुडा सिंह ने रेवाड़ी से 12 किलो ...

                                               

वीर लोरिक

वीर लोरिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश की अहीर जाति की दंतकथा का एक दिव्य चरित्र है। एस॰एम॰ पांडे ने इसे भारत के अहीर कृषक वर्ग का राष्ट्रीय महाकाव्य कहा है। लोरिकायन, या लोरिक की कथा, भोजपुरी भाषा की एक नीति कथा है। इसे अहीर जाति की रामायण का दर्जा दिया ...

                                               

चितपावन

चितपावन उत्तर भारत के भूमिहारों का एक समूह है जिनका वर्तमान निवास स्थान मुख्यतः महाराष्ट्र एवं कोंकण क्षेत्र है। छठी-सातवीं सदी के आस-पास बिहार से भूमिहारों का एक जत्था चलकर महाराष्ट्र के कोंकण में जा बसा और आगे चलकर यही चितपावन कहलाए । पुनः 13 व ...

                                               

कलीता जाति

कलिता पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य मे पायी जाने वाली एक जाति है। यह जाति संयुक्त रूप से स्वयं को क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत मानती है। बहुत पहले 15वी-16वी शताब्दी मे कलिता साम्राज्य के अस्तित्व के ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध है।

                                               

बैसला

8वीं सदी के दौरान, विशाल देव चौहान नामक एक गुर्जर प्रतिहार शासक को बिसाल देव उपनाम से बेहतर जाना जाता था। उनके वंशज को बैसले या बैसला कहा जाता था। एक अन्य सिद्धांत के अनुसार, कुषाण राजा कनिष्क यूनानियों द्वारा बैसलो को "बैसिलो" शीर्षक दिया गया था ...

                                               

जाट इतिहास

जाट एक जाति है, हालांकि इसने बहुत तीव्रता से विकास किया है । जाट ऐसी भारतीय जाति रही है जिसके लोग इस देश में राजा भी बने हैं। जाटों ने स्वंय की एक सभ्यता खड़ी करी, पंचायत इन्हीं की देन मानी जाती है। जाटों में बड़े स्तर पर पलायन हुये और ये लोग जंग ...

                                               

जाट रेजिमेंट

जाट रेजिमेंट भारतीय सेना की एक पैदल सेना रेजिमेंट है। यह सेना की सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा वीरता पुरस्कार विजेता रेजिमेंट है। रेजिमेंट ने वर्ष 1839-1947 के बीच 19 और स्वंत्रता के पश्चात आठ महावीर चक्र, आठ कीर्ति चक्र, 32 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्और ...

                                               

मुसलमान जाट

मुस्लिम जाट या मुसलमान जाट भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्रों के जाट लोगों के पितृवंशीय वंशज हैं जो इस्लाम के अनुयायी हैं। वे मुख्य रूप से पाकिस्तान और भारत दोनों के सिंध और पंजाब क्षेत्र में पाए जाते हैं। जाट मुसलमान पाकिस्तान के आज़ाद कश्मीर ...

                                               

स्यावड़ माता

स्यावड़ माता अन्न पैदा करने वाली देवीहै। स्यावड़ माता को राजस्थान के जाट किसान याद करने के पश्चात ही बाजरा बीजना प्रारंभ करते हैं। बैल के हल जोड़कर खेत के दक्षिण किनारे पर जाकर उत्तर की तरफ मुंह कर हळसोतिया कर प्रथम बीज डालने के साथ ही स्यावड़ मा ...

                                               

अग्रहारम

अग्रहारम या अग्रहार उस ग्राम को कहते हैं जिसके वासी पूर्णतः ब्राह्मण हों। विभिन्न जाति वाले गावों के उस भाग को भी अग्रहारम कहते हैं जिसमें ब्राह्मण रहते हैं। बहुत समय पहले इन्हें चतुर्वेदीमंगलम भी कहा जाता था।

                                               

काशी का इतिहास

गंगा तट पर बसी काशी बड़ी पुरानी नगरी है। इतने प्राचीन नगर संसार में बहुत नहीं हैं। वाराणसी का मूल नगर काशी था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, काशी नगर की स्थापना हिन्दू भगवान शिव ने लगभग ५००० वर्ष पूर्व की थी, जिस कारण ये आज एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थल ...

                                               

मैथिल ब्राह्मण

मैथिल ब्राह्मणों का नाम मिथिला के नाम पर पड़ा है। मिथिला के ब्राह्मणो को मैथिल ब्राह्मण कहा जाता है। मिथिला प्राचीन काल में भारत का एक राज्य था| मिथिला वर्तमान में एक सांस्कृतिक क्षेत्र है जिसमे बिहार के तिरहुत, दरभंगा, मुंगेर, कोसी, पूर्णिया और ...

                                               

सनाढ्य ब्राह्मण

सनाढ्य का शाब्दिक अर्थ दो शब्दों से मिलकर बना है,सन्+आढय जिसका अर्थ सन् अर्थात तप और आढ्य अर्थात ब्रम्हा। ब्रम्हा के तप से उत्पन्न ब्राम्हण और तपस्या में रत रहने बाले अर्थात तपस्वी। ब्राह्मणों को सनाढ्य की उपाधी, स्वयं भगवान श्री राम द्वारा दी गई ...

                                               

सरयूपारीण ब्राह्मण

हर महादेव सस्नेहाभिवादन! वास्तव में श्री कान्यकुब्ज ब्राह्मणजनों में से किसी एक बंधु ने यह दिगभ्रमित पोस्ट विकीपीडिया पर अपलोड की है,कि, सरयूपारीण कान्यकुब्जों से निकले हैं! वास्तविकता यह है:- पुराणों से पता चलता हैं कि देवगण हिमालय पर्वत पामीर क ...

                                               

मराठा

मराठा भारत में जातियों का एक समूह मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में रहता है। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के मुताबिक, "मराठा, भारत के इतिहास के बहादुर लोग हैं, इतिहास में प्रचलित हैं और हिंदू धर्म के विजेता हैं।" वे मुख्यतः भारतीय राज्य महाराष्ट्र ...

                                               

राजपूतों की सूची

राजपूत भारतीय उपमहाद्वीप की एक प्रभावशाली जाति है जो शासन और सत्ता के सदैव निकट रही है। अपनी युद्ध-कुशलता और शासन-क्षमता के कारण राजपूतों ने पर्याप्त ख्याति अर्जित की।

                                               

कृष्णा कुमारी

कृष्ण कुमारी को मारवाड़ के भीम सिंह के साथ सगाई करने का फैसला किया गया था। लेकिन 1803 में उसके पति की मृत्यु हो गई, जब वह सिर्फ 9 वर्ष की थी। उसके पिताजी महाराणा भीम सिंह ने तब अंबर जयपुर के जगत सिंह के साथ एक सगाई की व्यवस्था की। मारवाड़ के उत्त ...

                                               

पद्मिनी

रानी पद्मिनी के साहस और बलिदान की गौरवगाथा इतिहास में अमर है। सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रतनसिंह के साथ ब्याही गई थी। रानी पद्मिनी बहुत खूबसूरत थी और उनकी खूबसूरती पर एक दिन दिल्ली के सुल्तान अ ...

                                               

बरगुजर

बडगुजर या बढ़गुजर भारत के राजपूत लोगों की एक उपजाति होती है। यह भारत के प्राचीन राजपूतों में से एक है। बड़गुजर राजपूत श्री राम चन्द्र जी के पुत्र लव के वंशज है। बड़गुजर राजवंश सम्मानित राजपूत में से एक राजपूत है। यह मुस्लिम सुल्तानों के कट्टर विर ...

                                               

भदौरिया

भदौरिया एक राजपूत कुल का नाम है। इनका नाम ग्वालियर, मध्यप्रदेश के ग्राम भदावर पर पड़ा। इस वंश के महाराजा को महेन्द्र की उपाधि से संबोधित किया जाता था। यह उपाधि आज भी इस कुल के मुखिया के नाम रहती है। एक पाण्डुलिपि के अनुसार १६५० में आगरा के भदौरिय ...

                                               

रजवाड़ा

रजवाड़ा शब्द का अर्थ होता है रियासत का मालिक राजा। मध्य-युग तथा ब्रिटिश भारत में देशी रिया्सत। यह पुल्लिंग शब्द है, जिसका विच्छेद है राज्य+बाड़ा rajaon ka Raj karne ka Chitra

                                               

रत्नसिंह

बप्पा रावल के वंश के अंतिम शासक रावल रत्नसिंह रावल समरसिंह के पुत्र थे तथा तेरहवीं शताब्दी के बिल्कुल आरंभिक वर्षों में चित्तौर की राजगद्दी पर बैठे थे। इनकी विशेष ख्याति हिन्दी के महाकाव्य पद्मावत में राजा रतनसेन के नाम से रही है। कुछ इतिहासकार इ ...

                                               

राणा

राणा एक ऐतिहासिक शीर्षक है जिसका चलन प्राचीन समय में था। पुराने समय में ज्यादातर मेवाड़ के शासक इस शीर्षक को अपने नाम के आगे लगाते हैं। सबसे पहले राणा राणा हम्मीर सिंह थे जिन्होंने इस ऐतिहासिक शीर्षक को अपने नाम के आगे रखा था। जबकि रानी शीर्षक का ...

                                               

कुशवाहा

कुशवाहा भारतीय समाज की एक वंश/जाति है। 20वीं शताब्दी में उन्होने स्वयं को राजपूत वंश का बताया। इस जाति का कई स्वतंत्र राज्यों व रियासतों पर शासन रहा हैं जिनमे से अलवर, आमेर व मैहर प्रमुख हैं। कुशवाहा या कछवाहा, स्वयं को अयोध्या के सूर्यवंशी राजा ...

                                               

तोमर वंश

तोमर तंवर, या कुंतल उत्तर पश्चिम भारत एक जाट और राजपूत वंश है। तोमरो का मानना है कि वे चन्द्रवन्शी है। इन्होंने वर्तमान दिल्ली की स्थापना दिहिलिका के नाम से की थी।

                                               

आरिक़ बोके

आरिक़ बोके मंगोल साम्राज्य से संस्थापक चंगेज़ ख़ान का पोता और उसके सबसे छोटे बेटे तोलुइ ख़ान का सबसे छोटा पुत्र था। उसकी माता सोरग़ोग़तानी बेकी ने उसे और उसके भाइयों को बहुत निपुणता से पाला। उसका बड़ा भाई मोंगके ख़ान कुछ अरसे के लिए साम्राज्य का ...

                                               

आस्त्राख़ान ख़ानत

आस्त्राख़ान ख़ानत वोल्गा नदी के कैस्पियन सागर के साथ बने नदीमुख इलाक़े में स्थित १५वीं और १६वीं सदी ईसवी में एक तातार लोगों की ख़ानत थी। यह वही क्षेत्र है जहाँ आधुनिक युग में रूस का आस्त्राख़ान शहर स्थित है। यह ख़ानत सुनहरे उर्दू ख़ानत के पतन के ...

                                               

उत्तरी युआन राजवंश

उत्तरी युआन राजवंश युआन राजवंश के उन बचे-कुचे भागों को कहते हैं जो अपने सन् १३६८ में चीन से सत्ता-वांछित और निकाले जाने के बाद मंगोलिया वापस चले गए थे। ध्यान रहे कि चीन पर शासन करने वाला युआन राजवंश वास्तव में चीनी जाति का नहीं बल्कि मंगोल जाति क ...

                                               

ओगताई ख़ान

ओगताई ख़ान मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का तीसरा पुत्र था और पूरे साम्राज्य का दूसरा ख़ागान था। उसने अपने पिता के ईरान, चीन और मध्य एशिया को मंगोल साम्राज्य के अधीन करने के अभियान में बहुत हिस्सा लिया। उसे एक ...

                                               

कुबलई ख़ान

कुबलई ख़ान या खुबिलाई ख़ान मंगोल साम्राज्य का पाँचवा ख़ागान था। उसने १२६० से १२९४ तक शासन किया। वह पूर्वी एशिया में युआन वंश का संस्थापक था। उसका राज्य प्रशान्त महासागर से लेकर यूराल तक और साइबेरिया से वर्तमान अफगानिस्तान तक फैला हुआ था जो विश्व ...

                                               

गुयुक ख़ान

गुयुक ख़ान या गोयोक ख़ान मंगोल साम्राज्य का तीसरा ख़ागान था। वह चंगेज़ ख़ान का पोता और ओगताई ख़ान का सबसे बड़ा पुत्र था। सन् १२४८ में सफ़र करते हुए अज्ञात कारणों से उसकी मृत्यु हो जाने के बाद उसके चाचा तोलुइ ख़ान का पुत्र मोंगके ख़ान ख़ागान बना।

                                               

चंगेज़ ख़ान

चंगेज़ ख़ान एक मंगोल ख़ान था जिसने मंगोल साम्राज्य के विस्तार में एक अहम भूमिका निभाई। इतिहासकार मानते हैं कि चंगेज खान एक बौद्धया हिन्दू था। वह अपनी संगठन शक्ति, बर्बरता तथा साम्राज्य विस्तार के लिए प्रसिद्ध हुआ। इससे पहले किसी भी यायावर जाति के ...

                                               

चग़ताई ख़ान

चग़ताई ख़ान मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का दूसरा पुत्र था। उसने अपने पिता के मध्य एशिया को मंगोल साम्राज्य के अधीन करने के अभियान में बहुत हिस्सा लिया। उसे एक क़ाबिल और सहासी सिपहसालार माना जाता है। इसी के ना ...

                                               

चग़ताई ख़ानत

चग़ताई ख़ानत एक तुर्की-मंगोल ख़ानत थी जिसमें मध्य एशिया के वे क्षेत्र शामिल थे जिनपर चंगेज़ ख़ान के दूसरे बेटे चग़ताई ख़ान का और उसके वंशजों का राज था। आरम्भ में यह ख़ानत मंगोल साम्राज्य का हिस्सा मानी जाती थी लेकिन आगे चलकर पूरी तरह स्वतन्त्र हो ...

                                               

जोची ख़ान

जोची ख़ान मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का पहला पुत्र था। उसने अपने पिता के मध्य एशिया को मंगोल साम्राज्य के अधीन करने के अभियान में बहुत हिस्सा लिया। उसे एक क़ाबिल और सहासी सिपहसालार माना जाता है।

                                               

तुमेन

इस शब्द में मिलते-जुलते अन्य नामों वाले लेखों के लिए, तूमन का बहुविकल्पी पृष्ठ देखें तुमेन तुर्कियों और मंगोलों की संख्या प्रणाली में दस-हज़ार के लिए प्रयोग होने वाली संख्या थी। फ़ौजी दृष्टिकोण से दस-हज़ार सैनिकों के दस्तों को तुमेन बुलाया जाता थ ...

                                               

तोलुइ ख़ान

तोलुइ ख़ान मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान और उसकी मुख्य पत्नी बोरते का चौथा और सबसे छोटा पुत्र था। अपने पिता की वसीयत में उसे मंगोलिया का क्षेत्र मिला, जो मंगोलों की मातृभूमि थी। चंगेज़ ख़ान की मृत्यु के बाद जब ओगताई ख़ान को अगला सर्वोच् ...

                                               

बोरते

बोरते मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान की पहली और मुख्य पत्नी थी। इन्हें मंगोल-प्रथानुसार ख़ातून की उपाधि हासिल थी। उन्हें मंगोल साम्राज्य की माहरानी भी माना जाता था। बोरते की सगाई बहुत कम उम्र में चंगेज़ ख़ान से हो गई थी और १७ वर्ष की आयु ...

                                               

मंगोल साम्राज्य

मंगोल साम्राज्य 13 वीं और 14 वीं शताब्दियों के दौरान एक विशाल साम्राज्य था। इस साम्राज्य का आरम्भ चंगेज खान द्वारा मंगोलिया के घूमन्तू जनजातियों के एकीकरण से हुआ। मध्य एशिया में शुरू यह राज्य अंततः पूर्व में यूरोप से लेकर पश्चिम में जापान के सागर ...

                                               

मंगोलों का गुप्त इतिहास

मंगोलों का गुप्त इतिहास मंगोल भाषा की सबसे पुरानी साहित्य कृति है जो आधुनिक काल तक उपलब्ध है। चंगेज़ ख़ान की सन् १२२७ में हुई मृत्यु के बाद यह किसी अज्ञात लेखक द्वारा मंगोल शाही परिवार के लिए लिखी गई थी। माना जाता है कि इसे सबसे पहले प्राचीन मंगो ...

                                               

मोंगके ख़ान

मोंगके ख़ान मंगोल साम्राज्य का चौथा ख़ागान था। उसने १ जुलाई १२५१ से ११ अगस्त १२५९ में हुई अपनी मृत्यु तक शासन किया। मोंगके ख़ान मंगोल साम्राज्य से संस्थापक चंगेज़ ख़ान का पोता और उसके सबसे छोटे बेटे तोलुइ ख़ान का बेटा था। उसकी माता सोरग़ोग़तानी ब ...

                                               

युआन राजवंश

युआन राजवंश सन् १२७१ ईसवी से सन् १३६८ ईसवी तक चलने वाला एक राजवंश था जिसके साम्राज्य में आधुनिक चीन का लगभग पूरा हिस्सा, सारे मंगोलिया का भूक्षेत्और कुछ आसपास के इलाक़े शामिल थे। इसकी स्थापना मंगोल नेता कुबलई ख़ान ने की थी, जो चंगेज़ ख़ान का पोता ...