ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 13




                                               

शिवरामकृष्ण अय्यर पद्मावती

शिवरामकृष्ण अय्यर पद्मावती प्रख्यात भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञ है। वह राष्ट्रीय हार्ट संस्थान, दिल्ली के निदेशक हैं और ऑल इंडिया हार्ट फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष है। संस्थान विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ छात्रों को प्रशिक्षित करने में रोकथाम कार्ड ...

                                               

मनोचिकित्सा

किसी मनोचिकित्सक द्वारा किसी मानसिक रोगी के साथ सम्बन्धपूर्वक बातचीत एवं सलाह मनोचिकित्सा या मनश्चिकित्सा कहलाती है। यह लोगों की व्यवहार सम्बन्धी विविध समस्याओं में बहुत उपयोगी होती है। मनोचिकित्सक कई तरह की तकनीकें प्रयोग करते हैं, जैसे- प्रायोग ...

                                               

क्रोध का नियंत्रण

क्रोध पर नियंत्रण से अभिप्राय उन मनोचिकित्सकीय विधियों से है जिनका उपयोग करके एवं जिनके अभ्यास से क्रोधी स्वभाव के व्यक्ति लाभान्वित हो सकते हैं। क्रोध को नियंत्रण में रखने से बहुत से लाभ होते हैं। इसके लिये कुछ प्रसिद्ध विधियाँ हैं - संचार रणनीत ...

                                               

मनोविकृतिविज्ञान

मनोविकृतिविज्ञान शब्द का कई अर्थों में उपयोग किय जाता है। इसमें से एक अर्थ यह है: मानसिक रोग, मानसिक विपत्ति तथा असामान्य/दुरनुकूलक व्यवहार का अध्ययन। इस अर्थ में साइकोपैथोलॉजी शब्द का मनोरोगविज्ञान में प्रायः उपयोग होता है जहाँ पैथोलॉजी का अर्थ ...

                                               

व्यक्ति-केन्द्रित चिकित्सा

उपचारार्थी केंद्रित मनश्चिकित्सा या व्यक्ति-केन्द्रित चिकित्सा या अनिर्देशात्मक चिकित्सा मानसिक उपचार की एक विधि है जिसमें रोगी को लगातार सक्रिय रखा जाता है और बिना कोई निर्देश दिए उसे निरोग बनाने का प्रयत्न किया जाता है। प्रकारांतर से यह स्वसंरक ...

                                               

संज्ञानात्मक व्यवहारपरक चिकित्सा

संज्ञानात्मक व्यवहारपरक चिकित्सा मनोचिकित्सा की वह पद्धति है मनोरोगी के सोचने तथा उनके व्यवहापर ध्यान केन्द्रित करती है।यह व्यवहार चिकित्सा का ही एक रूप है इस पद्धति की मान्यता है कि किसी परिस्थिति के बारे में हमारी सोच ही तय करती है कि उस परिस्थ ...

                                               

अफ़ीम

अफ़ीम अफ़ीम के पौधे पैपेवर सोमनिफेरम के दूध को सुखा कर बनाया गया पदार्थ है, जिसके सेवन से मादकता आती है। इसका सेवन करने वाले को अन्य बातों के अलावा तेज नीद आती है। अफीम में १२% तक मार्फीन पायी जाती है जिसको प्रसंस्कृत करके हैरोइन नामक मादक द्रब्य ...

                                               

गाँजा

गांजा, एक मादक पदार्थ है जो गांजे के पौधे से भिन्न-भिन्न विधियों से बनाया जाता है। इसका उपयोग मनोसक्रिय मादक के रूप में किया जाता है। मादा भांग के पौधे के फूल, आसपास की पत्तियों एवं तनों को सुखाकर बनने वाला गांजा सबसे सामान्य है। गांजा का सेवन कर ...

                                               

ड्रग ओवर डोज़

"ओवरडोज" शब्द का तात्पर्य है कि दवा के लिए एक आम सुरक्षित खुराक और उपयोग होता है; इसलिए, यह शब्द आमतौपर केवल दवाओं पर लागू होता है, जहरन हीं, भले ही जहर कम खुराक पर हानि रहित हों। ड्रग ओवरडोज कभी-कभी जानबूझकर आत्महत्या या स्वयं को नुकसान पहुंचाने ...

                                               

पोस्त

पोस्त या पोस्ता फूल देने वाला एक पौधा है जो पॉपी कुल का है। पोस्त भूमध्यसागर प्रदेश का देशज माना जाता है। यहाँ से इसका प्रचार सब ओर हुआ। इसकी खेती भारत, चीन, एशिया माइनर, तुर्की आदि देशों में मुख्यत: होती है। भारत में पोस्ते की फसल उत्तर प्रदेश, ...

                                               

बार्बीचुरेट्स

बार्बीचुरेट्स वह नारकोटिक औषधियां हैं जो केंद्रीय तंत्रिकातंत्पर हावी होते हैं। यह व्यक्ति की थकावट दूर करने में उपयोगी है, मानसिक तनाव दूर करता है और नींद के लिए उपयोगी होते है। कुछ बार्बीचुरेट्स का उपयोग डाक्टर पागलपन के इलाज़ में और बेहोशी के ...

                                               

भांग

भांग मुख्यतः भारतीय उपमहाद्वीप में पेय या मादक धूम्रपान के रूप में उपयोग में लाया जाने वाला पदार्थ है। यह मुख्यतः नारी भांग के पौधे की पत्तियों, कलियों तथा फूलों से तैयार की जाती है।

                                               

मादक पदार्थ एवम अपराध

मादक पदार्थ एवम अपराध का मतलब है वह नारकोटिक पदार्थ जो की किसी भी अपराध को अंजाम देने में सहायक होते हैं। यह पदार्थ किसी भी हिंसक या अहिंसक अपराध को बदावा डे सकते हैं। इनमे आने वाले अपराध अक्सर लोगो को हानि ही पहुंचाते हैं। मादक पदार्थ लेने से व् ...

                                               

मादकता

मादक पदार्थों के सेवन से उत्पन्न स्थिति को दव्य मादकता कहते हैं। व्यसन शब्द अंग्रेजी के ‘एडिक्ट‘ शब्द का रूपान्तरण है जिससे शारीरिक निर्भरता की स्थिति प्रकट हेती है। व्यसन का अभिप्राय शरीर संचालन के लिए मादक पदार्थ का नियमित प्रयोग करना है अन्यथा ...

                                               

हेरोइन

हेरोइन diacetylmorphine), भी diamorphine के रूप में जाना जाता है, एक अर्द्ध कृत्रिम opioid अफ़ीम, अफीम अफीम के व्युत्पन्न से संश्लेषित दवा है. यह अफ़ीम -acetyl-अफ़ीम) के 3.6-diacetyl एस्टर है. सफेद क्रिस्टलीय फार्म सामान्यतः हाइड्रोक्लोराइड नमक d ...

                                               

आनुवांशिक परामर्श

आजकल बहुत वैज्ञानिकों ने ये आविष्कार किया है कि ऐसे कई रोग है जो आनुवांशिक है | यह रोग बहुत खतरनाक होते हैं | इसलिए बेहतर है कि इनकी चिकित्सा पहले ही हो जाए| ऐसे रोगों के चिकित्सा करने वाले को बोलते है जेनेटिक काउंसलर या आनुवांशिक परामर्श| ये लोग ...

                                               

ऊतक परीक्षा

ऊतक परीक्षा निदान के लिए जीवित प्राणियों के शरीर से ऊतक को अलग कर जो परीक्षण किया जाता है उसे कहते हैं। अर्बुद के निदान की अन्य विधियाँ उपलब्ध न होने पर, संभावित ऊतक के अपेक्षाकृत एक बड़े टुकड़े का सूक्ष्म अध्ययन ही निदान की सर्वोत्तम रीति है। शल ...

                                               

अस्थिचिकित्सा

अस्थिचिकित्सा शल्यतंत्र का वह विभाग हैं, जिसमें अस्थि तथा संधियों के रोगों और विकृतियों या विरूपताओं की चिकित्सा का विचार किया जाता है। अतएव अस्थि या संधियों से संबंधित अवयव, पेशी, कंडरा, स्नायु तथा नाड़ियों के तद्गत विकारों का भी विचार इसी में ह ...

                                               

एक्यूप्रेशर

एक्यूप्रेशर शरीर के विभिन्न हिस्सों के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दबाव डालकर रोग के निदान करने की विधि है। चिकित्सा शास्त्र की इस शाखा का मानना है कि मानव शरीर पैर से लेकर सिर तक आपस में जुड़ा है। हजारों नसें, रक्त धमनियों, मांसपेशियां, स्नायु और हड्ड ...

                                               

औषधीय मिट्टी

औषधीय मिट्टी का प्रयोग प्रागैतिहासिक काल से चला आ रहा है। विश्व के विभिन्न भागों के आदिवासी अब भी मिट्टी का बहुतायत में उपयोग करते हैं। चिकित्सा के लिये कई प्रकार की मिट्टियाँ प्रयोग की जातीं हैं। ये प्रायः शरीर के बाहर ही उपयोग में लायी जाती हैं ...

                                               

गेहूं का ज्वारा

जब गेहूं के बीज को अच्छी उपजाऊ जमीन में बोया जाता है तो कुछ ही दिनों में वह अंकुरित होकर बढ़ने लगता है और उसमें पत्तियां निकलने लगती है। जब यह अंकुरण पांच-छह पत्तों का हो जाता है तो अंकुरित बीज का यह भाग गेहूं का ज्वारा कहलाता है। औषधीय विज्ञान म ...

                                               

केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसंधान परिषद

केंद्रीय आयुर्वेद एवं सिद्ध अनुसंधान परिषद) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय के आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी विभाग का स्ववित्तपोषित संस्था है। इसका मुख्यालय दिल्ली में है। इसकी स्थापना सन् १९७८ में हु ...

                                               

प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान

प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान या आर्थोपैथी या नेचुरल हाइजिन, प्राकृतिक चिकित्सा से उत्पन्न हुई एक वैकल्पिक चिकित्सा दर्शन है। आर्थोपैथी आन्दोलन का आरम्भ डॉ इसाक जेनिंग्स Isaac Jennings ने १८२२ के आसपास की थी।

                                               

प्राणशक्ति उपचार

प्राणशक्ति उपचार एक पूरक चिकित्सा पद्धति है जो रोगों के उपचार के लिये प्राणशक्ति के उपयोग का दावा करती है। कुछ प्राचीन सभ्यतों में इससे मिलती-जुलती चिकित्सा पद्धतियाँ प्रचलित थीं, जैसे मंत्र चिकित्सा, शमनिक हीलिंग, डिवाइन हीलिंग आदि।

                                               

मर्म चिकित्सा

मर्म चिकित्सा वास्तव में अपने अंदर की शक्ति को पहचानने जैसा है। शरीर की स्वचिकित्सा शक्ति ही मर्म चिकित्सा है। मर्म चिकित्सा से सबसे पहले शांति व आत्म नियंत्रण आता है और सुख का अहसास होता है। शरीर में 107 मर्म स्थान हैं, जिनसे मेडिकल के छात्रों क ...

                                               

मिट्टी चिकित्सा

प्राकृतिक चिकित्सा में माटी का प्रयोग कई रोगों के निवारण में प्राचीन काल से ही होता आया है। नई वैज्ञानिक शोध में यह प्रमाणित हो चुका है कि माटी चिकित्सा की शरीर को तरो ताजा करने जीवंत और उर्जावान बनाने में महती उपयोगिता है। चर्म विकृति और घावों क ...

                                               

रस चिकित्‍सा

पारा और गंधक के साथ काष्‍ठादिक औषधियों के योग से बनने वाली दवाओं को रसौषधि कहते हैं। रसौषधियों से रोगों की चिकित्‍सा जब की जाती है तब इसे रस चिकित्‍सा कहते हैं।

                                               

सूर्य चिकित्सा

सूर्य चिकित्सा के सिद्धान्त के अनुसार रोगोत्पत्ति का कारण शरीर में रंगों का घटना-बढना है। सूर्य किरण चिकित्सा के अनुसार अलग‍-अलग रंगों के अलग-अलग गुण होते हैं। लाल रंग उत्तेजना और नीला रंग शक्ति पैदा करता है। इन रंगों का लाभ लेने के लिए रंगीन बोत ...

                                               

केश प्रत्यारोपण

केश प्रत्यारोपण सर्जरी एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, जिसकी मदद से सिर के पिछले व साइड वाले हिस्से से, दाढ़ी, छाती आदि से बालों को लेकर सिर के गंजे भाग में implant कर दिया जाता है। इसकी वजह यह कि सिर के पिछले हिस्से के बाल आमतौपर नहीं झड़ते इस लिए सि ...

                                               

कार्ल रोजर्स

कार्ल रोजर्स अमेरिका के प्रसिद्ध मनश्चिकित्सक थे। मनश्चिकित्सा में मानवीय संवेदना को स्थान देने के लिये प्रसीध हैं। उपचारार्थी केंद्रित मनश्चिकित्सा नामक मानसिक रोगों के निवारण की एक मनोवैज्ञानिक विधि कार्ल रोजर्स द्वारा प्रतिपादित की गई है। रोजर ...

                                               

विद्युत्-आक्षेपी चिकित्सा

विद्युत्-आक्षेपी चिकित्सा मनश्चिकित्सा की एक मानक विधि है। सामान्यतः इसे आघात चिकित्सा या आम भाषा में बिजली के झटके कहा जाता है। यह एकध्रुवीय अवसाद का एक जैविक उपचार है जिसमें रोगी के सिर से इलेक्ट्रोड संलग्न कर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित करके म ...

                                               

वर्गानुवंशिकी

वर्गानुवंशिकी या फ़ाइलोजेनेटिक्स​ जीवों के बीच के क्रम-विकास के सम्बन्ध के अध्ययन का नाम है। इसमें उनके आनुवांशिकी लक्षणों की तुलना उनके डी॰ऍन॰ए॰ और प्रोटीन अणुओं का परीक्षण करके की जाती है और यह दावे किये जाते हैं कि कौनसी जातियाँ किन अन्य जातिय ...

                                               

इबोला वायरस

इबोला वायरस एक विषाणु है। यह वर्तमान में एक गंभीर बीमारी का रूप धारण कर चुका है। इस बीमारी में शरीर में नसों से खून बाहर आना शुरु हो जाता है, जिससे अंदरूनी रक्तस्त्राव प्रारंभ हो जाता है। यह एक अत्यंत घातक रोग है। इसमें ९०% रोगियों की मृत्यु हो ज ...

                                               

माल्टा ज्वर

माल्टा ज्वर एक अत्यन्त संक्रामक रोग है, जो ब्रूसेला जाति के जीवाणु द्वारा उत्पन्न होता है। इसे मेडिटरेनियन ज्वर, ब्रूसिलोलिस, या अंडुलेंट ज्वर भी कहते हैं। यह एक पशुजन्यरोग है। मनुष्यों में पालतू जानवरों, जैसे मवेशी कुत्ते या सूअर आदि, द्वारा इसक ...

                                               

रेबीज़

रेबीज़ एक विषाणु जनित बीमारी है जिस के कारण अत्यंत तेज इन्सेफेलाइटिस इंसानों एवं अन्य गर्म रक्तयुक्त जानवरों में हो जाता है। प्रारंभिक लक्षणों में बुखाऔर एक्सपोजर के स्थल पर झुनझुनी शामिल हो सकते हैं। इन लक्षणों के बाद निम्नलिखित एक या कई लक्षण ह ...

                                               

साल्मोनेला

साल्मोनेला प्रोटियोबैक्टीरिया संघ के गामाप्रोटियोबैक्टीरिया वर्ग के एंटेरोबैक्टीरियेसी कुल का एक वंश है। यह एक गतिशील, अंतर्बीजाणु न बनाने वाला, छड़ी-आकृति का एंटेरोबैक्टीरिया है। इसकी कोशिका 0.7 से 1.5 माइक्रोमीटर के व्यास की होती है और कशाभिकाओ ...

                                               

ऍचआइवी परीक्षण

एचआईवी जांच या परीक्षण सीरम, थूक या पेशाब में मानवी इम्यून डेफिशियेंसी वाइरस की मौजूदगी का पता लगाने के लिये किया जाता हैं। ऐसे परीक्षण एचआईवी एंटीबॉडियों, एंटीजनों या आरएनए का पता लगा सकते हैं।

                                               

अंडमान एवं निकोबार एड्स नियंत्रण सोसाइटी

केंद्र शासित क्षेत्र अंडमान एवं निकोबार के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के अंतर्गत काम करनेवाली संस्था अंडमान एवं निकोबार एड्स नियंत्रण सोसाइटी है। यह संस्था एड्स-सम्बन्धी जानकारी, स्वस्थ अथवा परामर्श केन्द्रों के संचालन, रक्त बैंकों के प्रब ...

                                               

अरुणाचल प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

अरुणाचल प्रदेश के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के अंतर्गत काम करनेवाली संस्था अरुणाचल प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी है। यह संस्था एड्स-सम्बन्धी जानकारी, स्वस्थ्य अथवा परामर्श केन्द्रों के संचालन, रक्त बैंकों के प्रबंधन अथवा स्वास्थ्य कर ...

                                               

असम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

असम में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम राज्य एड्स सेल से १९९२ में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के तहत स्वास्थ्य सेवा, असम के निदेशक के कार्यालय में स्थापित किया गया था। अक्टूबर १९९८ में असम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी का गठन किया गया था और भारत सरकार द ...

                                               

अहमदाबाद नगर निगम एड्स नियंत्रण सोसाइटी

नगर निगमों और अन्य शहरी स्थानीय निकायों जो सरकार के क्षेत्र काम करती हैं लोगों से निकटतम रहती हैं और नगरपालिका अध्यक्ष, नगर पार्षदों और अन्य नेताओं स्थानीय समुदायों की सेवा के लिए चुने जाते हैं। ऐसी ही एक संस्था अहमदाबाद नगर निगम एड्स नियंत्रण सो ...

                                               

आन्ध्र प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

आंध्र प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी का गठन २४ सितम्बर १९९८ को हुआ था। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के तहत काम करनेवाली यह संस्था आंध्र प्रदेश में पहले ही से एचआइवी-पीड़ित ५ लाख लोगों तथा राज्य की बढती हुई जनसँख्या को एचआईवी की जानकारी तथा इ ...

                                               

उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश एड्स नियंत्रण सोसाइटी भी उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के एड्स नियंत्रण अथवा जन-जागृति का कम करता है। राज्य के सभी जिलों में एड्स को रोकने के लिए और उच्च जोखिम-वाले समूहों और आम जनता में एचआईवी / एड्स के संचरण नियं ...

                                               

उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी एक ऐसा भारत की परिकल्पना करता है जहां पर हर व्यक्ति जो एचआईवी के साथ से जूज रहा हो गुणवत्ता की देखभाल और गरिमा के साथ इलाज पा सके। प्रभावी रोकथाम, देखभाल और एचआईवी / एड्स के लिए समर्थन एक वातावरण में हो सकता ...

                                               

ऍसआइवी

ऍसआइवी, रोग-प्रतिरक्षा एक ऐसा विषाणु है जोकि अफ्रीकी हरे बंदरों की रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रहार करता है और उनकी संक्रमणों के प्रति शरीर की क्षमता और प्रतिरोध को कम करता है। इसे अफ्रीकी हरे बंदरों के वायरस के रूप में भी जाना जाता है। एक अनुमान ...

                                               

कर्नाटक राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

राज्य में एचआइवी संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए एक लंबी अवधि के आधापर एचआइवी / एड्स जवाबी कार्रवाई के लिए राज्य की क्षमता को मजबूत बनाने के लिए कर्नाटक राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी का गठन हुआ है। विशेष परियोजना के उद्देश्य इस तरह हैं: एचआइवी ...

                                               

किशनगंज जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी

नेपाल सीमा पर बसे किशनगंज को एड्स के मामले में सबसे सम्वेदनशील मानते हुए सरकार व यूनीसेफ के सहयोग से किशनगंज में एड्स नियंत्रण कार्य 2003 में शुरू तो हुआ परन्तु जिले में एड्स रोगियों की बढती तादाद इस काम में जुटे सघतनो के कागजी काम पर मोहर लगते ह ...

                                               

केरल राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

केरल राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी, एचआइवी / एड्स महामारी का मुकाबला करने में राज्य की रणनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाती है। इसका काम एक शासकीया निकाय की देखरेख के द्वारा किया जाता है जो राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होता है। केरल राज्य ए ...

                                               

गुजरात राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

गुजरात में वर्ष 1986 में पहली बार एड्स रोगी का निदान किया गया था, उसी वर्ष में जिसमें देश में एड्स के पहले मामले की सूचना मिली थी। पहले राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के चरण के कार्यान्वयन के लिए एक राज्य एड्स सेल दिसंबर 1992 में बनाया गया था। ...

                                               

गोवा राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी

1997 में जैसे-जैसे एचआइवी / एड्स के रूप में गोवा में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनकर उभरने का इमकान हुआ, गोवा राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी बनाई गयी थी जो राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के दिशा-निर्देशों के तहत गोवा में कर रही है।